- प्रत्येक पर 4,500 रुपये अर्थदंड, न देने पर एक माह की अतिरिक्त कैद
- 25 वर्ष पुराने मामले में न्याय, तीन अभियुक्तों की हो चुकी है मृत्यु
- अर्थदंड की राशि में से 25 हजार रुपये पीड़ित को दिए जाएंगे
सोनभद्र। Sonprabhat News – Rajesh Pathak
करीब 25 वर्ष पूर्व कड़ाके की ठंड के मौसम में एक गरीब व्यक्ति का घर गिराकर पूरे परिवार को बेघर करने के मामले में न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) आलोक यादव की अदालत ने शनिवार को सुनवाई पूरी करते हुए 11 अभियुक्तों को दोषसिद्ध करार देते हुए प्रत्येक को दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही हर दोषी पर 4,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड की राशि अदा न करने की स्थिति में प्रत्येक दोषी को एक माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
अदालत के आदेशानुसार अर्थदंड से प्राप्त राशि में से 25 हजार रुपये पीड़ित को मुआवजे के रूप में प्रदान किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि इस मामले में विचारण के दौरान तीन अभियुक्तों की मृत्यु हो चुकी है।
क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष के अनुसार, इजराइल अहमद पुत्र सुबहान, निवासी परासी पांडेय, थाना रॉबर्ट्सगंज, जनपद सोनभद्र ने 5 जनवरी 2001 को थाने में तहरीर दी थी। पीड़ित ने बताया कि उसने गांव के लन्दर पुत्र शिवनाथ से 8,000 रुपये में एक बिस्वा जमीन खरीदी थी, जिस पर कच्चा मकान बनाकर वह अपने परिवार और बच्चों के साथ रह रहा था।
पीड़ित के अनुसार, 5 जनवरी 2001 की शाम करीब 4 बजे गांव के ही समई, प्रभु, हरी, सुरेश उर्फ गुड्डू, नरेश, मुन्ना, राजमनी, जियावन, गोपाल, कल्लू उर्फ बेचू, रामसूरत उर्फ जगत्तर, बंशी और राममूरत ने उसके घर पर धावा बोल दिया। आरोप है कि सभी ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी, घर का सामान बाहर फेंक दिया और मकान को गिरा दिया। उस समय इजराइल अहमद मजदूरी के लिए रॉबर्ट्सगंज गए हुए थे।
घटना की जानकारी मिलने पर पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की विवेचना कर पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन व बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के तर्क, गवाहों के बयान और पत्रावली का अवलोकन करने के बाद अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए 11 अभियुक्तों—
समई, प्रभु, हरी, सुरेश उर्फ गुड्डू, नरेश, मुन्ना, जियावन, गोपाल, कल्लू, रामसूरत उर्फ जगत्तर और राममूरत—
को दोषी ठहराते हुए दो-दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी सतीश वर्मा ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।
करीब ढाई दशक बाद आए इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की बड़ी जीत माना जा रहा है।
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