बैढन (सिंगरौली): उत्कर्ष विद्यालय के सभागार में सजी साहित्यिक संध्या, कविताओं ने बांधा समां.

बैढन, सिंगरौली | Sonprabhat News / Suresh Gupt- 

उत्कर्ष विद्यालय के सभागार में मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन के तत्वावधान में आयोजित काव्य गोष्ठी ने साहित्य प्रेमियों को भाव, विचार और संवेदना की अविस्मरणीय यात्रा पर ले गया। स्थानीय एवं आमंत्रित कवियों की सशक्त प्रस्तुतियों से सभागार देर शाम तक काव्य-रस में डूबा रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सुरेश गुप्त ग्वालियरी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में रीवा से पधारे सुप्रसिद्ध रचनाकार डॉ. कैलाश तिवारी की गरिमामयी उपस्थिति रही। शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुआ, जिसमें उपस्थित अतिथिगण शामिल हुए।

सम्मेलन के सचिव संजीव पाठक सौम्य एवं उपाध्यक्ष डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘गौतम’ ने आमंत्रित कवियों का पुष्पहार से स्वागत किया। मंच संचालन संस्था अध्यक्ष एवं डिग्री कॉलेज के व्याख्याता डॉ. प्रदीप सत्यव्रत ने अत्यंत सधे हुए अंदाज़ में किया। मां वाणी वंदना हेतु वरिष्ठ गीतकार श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव ‘प्रकृति’ को आमंत्रित किया गया, जिनकी सुमधुर प्रस्तुति “मां शारदा, स्वीकार लो यह प्रार्थना” ने वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

नवोदित कवयित्री शिवांगी गुप्ता ने कलम की ताकत को रेखांकित करते हुए श्रोताओं की तालियां बटोरी—
“ताकत इसकी मत पूछो, यह तलवारों से भारी है,
जब भी चलती यह कागज पर, हिलती दुनिया सारी है।”

इसके पश्चात उर्मिला तिवारी ने प्रेम और मौन के सूक्ष्म भावों को शब्द दिए—
“नयनों ने नयनों से, जब पहला स्वप्न बुना था…”

बरगवां (सिंगरौली) से पधारे वरिष्ठ कवि शंकर प्रसाद शुक्ल ने मानवीय मूल्यों पर केंद्रित रचनाएं सुनाईं—
“तरुवर सा है जीवन मेरा, मेरी आदत रही गंवाने की…”

गीतों और छंदों की रसवर्षा करते हुए श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव ‘प्रकृति’ ने श्रीराम-जानकी के मर्यादित भावलोक को सजीव किया। अवधेश नामदेव ने समकालीन यथार्थ पर प्रहार करती रचना प्रस्तुत की, वहीं संजीव पाठक सौम्य की ग़ज़ल “लूटम-लूट मची है…” ने सभागार में गहरी छाप छोड़ी।

वरिष्ठ रचनाकार डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘गौतम’ ने गीत, ग़ज़ल और मुक्तकों से भरपूर वाहवाही लूटी—
“बढ़ो कर्तव्य पथ पर तुम, यही अभियान है मेरा।”

मंच संचालन करते हुए डॉ. प्रदीप सत्यव्रत ने अपने सशक्त छंदों से कार्यक्रम को ऊंचाइयों पर पहुंचाया। अध्यक्षीय उद्बोधन में सुरेश गुप्त ग्वालियरी ने अपनी नवप्रकाशित पुस्तक “रिश्तों की तुरपाई” से अंश पाठ किया—
“जाने कितने धागे टूटे रिश्तों की तुरपाई में…”

अंत में मुख्य अतिथि डॉ. कैलाश तिवारी ने मुक्तक और गीतों से सभागार को काव्य-रस से सराबोर कर दिया—
“वे सब आज पराए लगते, दिखते जैसे ठगे पिताजी…”

कार्यक्रम का आभार व्यक्त डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘गौतम’ ने किया। तत्पश्चात स्वल्पाहार के साथ आमंत्रित कवियों को शॉल व श्रीफल भेंट कर कार्यक्रम का समापन हुआ।
कुल मिलाकर, यह काव्य गोष्ठी बैढन–सिंगरौली के साहित्यिक परिदृश्य में एक स्मरणीय अध्याय बनकर दर्ज हुई।

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