(संवाददाता –संजय सिंह)सोनभद्र। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर उत्सव ट्रस्ट सोनभद्र के सौजन्य से शुक्रवार शाम रॉबर्ट्सगंज स्थित आशीष पाठक एडवोकेट के आवास पर काव्य संध्या का आयोजन किया गया कार्यक्रम में कवियों ने गौरैया संरक्षण और पर्यावरण विषयक रचनाओं के माध्यम से लोगों को जागरूक किया तथा संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार रामनाथ शिवेंद्र ने की वाणी वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ प्रद्युम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने किया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति “तम हर जग माँ जगमग कर दे…” के माध्यम से माहौल को भक्तिमय बना दिया। कौशल्या कुमारी चौहान ने“जिनगी के थाती परान गौरैया…” सुनाकर गौरैया के विलुप्त होते अस्तित्व पर चिंता जताई। कवि धर्मेश चौहान एडवोकेट ने“मानव जीवन की सबसे बड़ी हार, पर्यावरण से क्यों नहीं करते
हो प्यार…” के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। संचालन कर रहे शायर अशोक तिवारी एडवोकेट ने “गौरैया मानव जीवन की पहचान है…” जैसी पंक्तियों से श्रोताओं को सोचने पर मजबूर किया। सोन संगीत फाउंडेशन के सुशील मिश्रा ने लोकगीत
प्रस्तुत कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई दी। वहीं दिलीप सिंह
‘दीपक’, जयराम सोनी, सुधाकर पांडेय, स्वदेशप्रेम, विवेक चतुर्वेदी, विशेष अस्थाना, दयानंद दयालु, प्रभात सिंह चंदेल,गोपाल कुशवाहा, राधेश्याम पाल, अलका केसरी सहित कई
कवियों ने अपनी रचनाओं से समा बांधा। सिद्धनाथ पांडेय ने सामयिक रचना के माध्यम से पर्यावरण और गौरैया संरक्षण का भावपूर्ण संदेश दिया। अध्यक्षीय संबोधन में रामनाथ शिवेंद्र ने कहा कि गौरैया सहित सभी जीव-जंतु, वन, जल, जमीन और पर्यावरण मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इनके बिना मानव सभ्यता का संतुलन संभव नहीं है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि कभी दुनिया में सबसे अधिक संख्या में पाई जाने वाली गौरैया आज विलुप्ति के कगार पर है। यह मानव की लापरवाही का परिणाम है। यदि समय रहते संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए तो इसका असर मानव अस्तित्व पर भी पड़ेगा इस अवसर पर डॉ. प्रकाश पाठक, स्वामी अरविंद सिंह, पंकज कनौडिया, अर्पण
बंका, विकास राज, नितिन सिंह, मनीष पाठक,सोनल सिंह, ऋषभ त्रिपाठी, हर्ष चौहान, अनीशा चौहान सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।अंत में उत्सव ट्रस्ट के गौरैया संरक्षण अभियान प्रमुख आशीष पाठक एडवोकेट ने सभी कवियों का आभार व्यक्त करते हुए लोगों से गौरैया संरक्षण अभियान से जुड़ने का आह्वान किया।

Mukesh (aka Shaktipal) is a journalist with 10 years of experience in Sonbhadra, known for his ground-level reporting and strong focus on local public issues.
















