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मजबूर और असहाय व्यवसायियों की दुकानों पर चला प्रशासन का बुलडोजर

सोनभद्र/ओबरा

श्याम जी पाठक-सोनप्रभात

ओबरा, सोनभद्र। आपको बताते चलें कि लगभग एक दशक पहले ओबरा परियोजना ने कुछ व्यवसायियों को दुकान आवंटन किया गया था। जिससे वहां लगभग ढाई हजार लोगों की जीविका चलती थी। आज उसे भी हमारे यहां के भ्रष्ट कानून ने तोड़ कर रख दिया। कुछ दुकानदारों से बात करने पर पता चला कि यह दुकाने हमें परियोजना के द्वारा आवंटित की गई थी। जिससे हमारे परिवार का भरण पोषण होता था। आज वह रोजगार भी हमसे छीन लिया गया।

सभी का कहना था कि यदि परियोजना को यह भूमि अधिग्रहण करना ही था तो पहले उन्हें हमें दूसरी जगह स्थान देना चाहिए था  , परंतु यहां परियोजना अपनी मनमानी कर रहा है। इस मामले में जब हमने एसडीएम साहब से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने यह कहते हुए पल्ला झाड़ की लिया कि हम यहां ला एंड आर्डर मेंटेन कर रहे हैं जैसा कि हमें आदेश है। वहीं उन्होंने कहा कि परियोजना के अधिकारियों से बात करिए क्या आर्डर है और क्या मामला है। वही लोग आपको स्पष्ट कर सकेंगे। जब हमने वहां मौजूद अधिकारियों से बात की तो उन्होंने कहा कि परियोजना ने किसी प्रकार का कोई आवंटन नहीं किया जब परियोजना ने आवंटन किया था उस समय कुछ विवाद चल रहा था।

वहीं दुकानदारों द्वारा यह सूचना भी प्राप्त हुई कि इस प्रकरण में मुकदमा भी सत्र न्यायालय में लंबित है। जिसमें दुकानदारों को स्टे भी प्राप्त है। फिर किस आधार पर सरकार और प्रशासन इतनी बड़ी कार्यवाही करने को बाध्य है। फिलहाल जो भी हो इस पूरे मामले में ना ही कोई नेता और ना ही कोई विधायक किसी को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में इस प्रकार की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी किसी को कानों कान जू तक नहीं रेंगी। आखिर सरकार और प्रशासन किस प्रकार कार्य करना चाहती है उसका क्या मापदंड और क्या आधार है उसका पता नहीं। परंतु इतना जरूर है कि गरीब और असहाय हमेशा दवाई और कुछ ले जाते हैं इसमें कोई दो राय नहीं है।

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