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वनाधिकार के नियमों का हो पालन-एआईपीएफ एआईपीएफ ने घोरावल तहसील में एसडीएम को दिया पत्रक।

  • उभ्भा कांड की पुनर्वृत्ति से बचाए घोरावल को।

सोनभद्र – सोनप्रभात

जितेंद्र चन्द्रवंशी 

घोरावल- सोनभद्र-  2 नवम्बर, 2020, सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के बाद वनाधिकार कानून के तहत जमा दावों की जिला प्रशासन द्वारा करायी जा रही जांच में हो रही अनियमितता और कानून का पालन न करने पर आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के जिला संयोजक कांता कोल और मजदूर किसान मंच के प्रभारी श्रीकांत सिंह के नेतृत्व में एसडीएम घोरावल को ज्ञापन दिया।

 

ज्ञापन में एसडीएम से घोरावल में भाजपा के नेताओं के इशारे पर कोल समुदाय के लोगों पर शांतिभंग का मुकदमा कायम करने और उन्हें उजाडने की कोशिश पर रोक लगाने की मांग की गई ताकि घोरावल में उभ्भा कांड़ की पुनर्वृत्ति से बचा जा सके। इस सम्बंध में एआईपीएफ के नेता दिनकर कपूर ने भी ईमेल से डीएम को पत्र भेजकर आवश्यक कार्यवाही की मांग की है। पत्र में नेताओं ने प्रदेश सरकार की अधिसूचना और शासनादेशों के अनुरूप कोलों को वनाधिकार कानून में जनजाति का लाभ प्रदान करने की भी मांग की है।

 

डीएम व एसडीएम को दिए ज्ञापन में बताया गया कि वनाधिकार कानून के अनुपालन में नियमों व कानूनों का पालन जमीनीस्तर पर नहीं किया जा रहा है। परसौना गांव का उदाहरण देते हुए कहा गया कि इस गांव में गोंड़, कोल आदि आदिवासी समुदाय के लोग पुश्तैनी रूप से वनभूमि पर काबिज है और इसके पर्याप्त प्रमाण उनके पास है। लेकिन मौके पर गए क्षेत्रीय लेखपाल द्वारा वनाधिकार कानून के नियमों के अनुसार न तो स्थलीय निरीक्षण किया गया और न ही किसी भी दावेदार को निरीक्षण के सम्बंध में कोई भी लिखित सूचना दी गई। स्पष्टतः यह वनाधिकार कानून और उसके सुसंगत नियमों 2008 व यथा संशोधित नियमावली 2012 के विरूद्ध है। यह माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की भी अवहेलना है। इस गांव में भाजपा के लोगों ने कोल महिला से हुए दुव्र्यवहार की थाने पर शिकायत करने के कारण राजनीतिक द्वेषवश दबाब डालकर वन विभाग के वन दरोगा से कोल समुदाय के लोगों पर शांतिभंग का मुकदमा करा दिया और उन्हें पुश्तैनी जमीन से उजाडने की लगातार कोशिश की जा रही है।

 

तनाव का यह माहौल वहां कभी भी उभ्भा कांड की पुनर्वृत्ति करा सकता है, जिसे रोकने की जरूरत है। पत्र में प्रदेश सरकार की अधिसूचना 2005 का हवाला देते हुए कोल जाति को वनाधिकार कानून में जनजाति का लाभ प्रदान करने की मांग उठाई गई। ज्ञापन देने वालों में अमर सिंह गोंड़, सेवालाल कोल, संतलाल बैगा, केशनाथ मौर्य, रामदुलारे प्रजापति, सूरज कोल, लाल बहादुर गोंड़, सुभाष भारती, विजय कोल, कैलाश चैहान, सुमारी पासी, छोटकी कोल, रूपलाल कोल, द्वारिका बिंद समेत दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे।

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