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गुरु गोविंद सिंह जयंती पर विशेष 2021:- जब गुरु गोविन्द सिंह ने मांगे पांच लोगों के सिर।

लेख – एस०के० गुप्त “प्रखर” – सोनप्रभात 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह जी का जन्म पौष महीने की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को हुआ था। उन्होंने खालसा वाणी – “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह” दी थी। 22 दिसंबर 1666 को पटना में सिखों के 9वें गुरु तेगबहादुर और माता गुजरी के घर जन्म लिया था। घर पर माता पिता ने बड़े प्यार से इस बच्चे का नाम गोविन्द राय रखा। गोविंद का बचपन शरारतों से भरा था, लेकिन जल्द ही बालक की रुचि खिलौने से हटकर तलवार, बरछी, कटार पर आ गयी थी।

गुरु गोबिंद सिंह ने सिक्खों के जीवन जीने के लिए पांच सिद्धांत बताए है जिन्हें ‘पांच ककार’ कहा जाता है। पांच चीजें आती हैं जिन्हें खालसा सिख धारण करते हैं। ये हैं- ‘ ‘कंघा’, केश’, ‘कड़ा’, ‘कृपाण’ और ‘कच्छा’ इन पांचो के बिना सिक्खों की वेश को पूरा नहीं माना जाता है।

एक दिन एक सभा मे जब सब लोग इकट्ठा हुए थे। गुरु गोबिंद सिंह ने रौबदार आवाज में कहा, मुझे पाँच सिर चाहिए,सभा मे सन्नाटा सा छा गया तभी एक-एक करके पांच लोग उठे और कहा, हमारा सिर प्रस्तुत है गुरु गोबिंद सिंह पांचों को एक-एक कर अंदर ले गए वो जैसे ही उन्हें तंबू के अंदर ले जाते कुछ देर बाद वहां से रक्त की धार बह निकलती और भीड़ की बैचेनी भी बढ़ती जाती पांचों के साथ ऐसा ही हुआ।

और अंत में गुरु गोबिंद सिंह अकेले तंबू में गए और पांचो के साथ लौटे तो भीड़ भी आश्चर्य चकित हो गयी। पांचो युवक गुरु गोबिंद सिंह के साथ थे, नए कपड़े पहने, पगड़ी धारण किए हुए. गोबिंद सिंह तो उनकी परीक्षा ले रहे थे, औऱ कहा कि अब तुम पंच प्यारे हो, उन्होंने एलान किया कि अब से हर सिख युवक कड़ा, कृपाण, केश, कच्छा और कंघा धारण करेगा. यहीं से खालसा पंथ की स्थापना हुई थी।

इसके बाद गुरु गोबिंद सिंह ने सैन्य दल का गठन किया, हथियारों का निर्माण करवाया और युवकों को युद्धकला का भी प्रशिक्षण दिया, क्योंकि उनको लगता था कि केवल संगठन से काम नहीं बनेगा, सैन्य संगठन भी बनाना होगा ताकि समुदाय और धर्म की रक्षा की जा सके। जीवन के आखिरी दिनों में गुरु गोबिंद सिंह ने मुगलों के खिलाफ गुरिल्ला लड़ाई छेड़ दी थी। वो छुपकर रहते और अचानक मुगलों पर हमला बोल देते थे। उन्होंने, कभी मुगलों के आगे अपना सिर नहीं झुकाया, न अपने धर्म से कोई समझौता किया।

गुरु गोबिंद सिंह का जीवन परोपकार और त्याग का जीता जागता उदाहरण है। गुरु गोविंद ने अपने अनुयायियों को मानवता को शांति, प्रेम, करुणा, एकता और समानता की पढ़ाई। आज उनके जन्म दिवस के मौके पर पूरी दुनिया उन्हें कर रही है शत शत नमन……….।

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