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कवि गोष्ठी का आयोजन -: स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओं से वाहवाही बटोरी।

विन्ध्य नगर,बैढन- सिंगरौली

सुरेश गुप्त “ग्वालियरी” – सोनप्रभात

बाहर से सब हँसते दिखते, अन्दर डरे डरे से हैं!! न जाने कब क्या हो जाये , अन्दर मरे मरे से है!! –

सुरेश गुप्त “ग्वालियरी”

मानस कथा वाचक ,राष्ट्रीय अध्यक्ष विश्व हिन्दू जागरण परिषद, एवं श्री राम जन्म भूमि मन्दिर निर्माण न्यास अयोध्या के उपाध्यक्ष स्वामी आत्मा नंद सरस्वती जी के पावन उपस्थिति में हर्रई पूर्व स्थित बशिष्ठ पांडेय के आवास पर एक कवि गोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ।

जिसमें स्थानीय कवियों ने अपनी रचनाओँ की एक से एक बढकर प्रस्तुति दी, गोष्ठी की अध्यक्षता स्वामी जी एवं संचालन वरिष्ठ साहित्यकार व संचालक नारायण दास जी विकल ने किया माँ वीणा पाणि की पूजा अर्चना के बाद राम खिलावन मिश्र ने सरस्वती वंदन कर गोष्ठी का शुभारंभ किया , पहले पायदान पर हास्य व व्यंग्य के बरिष्ठ कवि एस पी तिवारी ने जिस स्वदेश की धरती ने,अनुपम रत्न उगाये! श्रद्धा अटूट निज देश भक्ति का,मन में भाव जगाये!! रचना सुनाकर वाह वाही बटोरी।

अगली पायदान पर मानवता वादी कवि व बरिष्ठ रचनाकार प्रवेँदु दुबे चंचल ने अपनी प्रस्तुति “यह मुझे उम्मीद है कि, तुम मुझे पहचान लोगे ” सुनाकर माहौल को गम्भीर बना दिया।

गजल कार संजीव कुमार पाठक ने माहौल को बदलने हेतु अपने सस्वर गजल की प्रस्तुति देते हुए “देखा था स्वप्न मिल जुल के जो स्वप्न लोक के,यथार्थ पूरे हो गये , अधूरे स्वप्न लोक के” प्रस्तुत किया।

विशिष्ठ अतिथि के रूप में पधारे साहित्य कार प्रवेश मिश्रा ( महिला व बाल विकास अधिकारी) ने अपने मुक्तकों व कविताओं को देश के रण बाकुँरो को समर्पित करते हुए “स्वयं के राष्ट्र के खातिर, लुटा दी जान वीरों ने, सुनाकर माहौल को राष्ट्रीय भावना से ओत प्रोत कर दिया।

वरिष्ठ कवि व पत्रकार सुरेश गुप्त” ग्वालियरी ने “कष्ट में भी ढूँढ कर सुख, जिन्दगी आसान कर ले, दर्द के बाजार में कुछ, प्यार का सामान कर ले,है समंदर बहुत गहरा, पर उसी में रत्न भी हैं, तू उसी में खोज का अभियान कर ले ” सुनाकर वाह वाही बटोरी।

गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुए प्रतिष्ठित रचनाकार राम खिलावन मिश्रा ने ” दूसरों के प्रति भावना ऐसी हमारी चाहिये, मित्र वत व्यवहार हो,तब सुख सफलता पाईये” सुनाकर गोष्ठी के संचालक “विकल” जी को आमंत्रित किया। आपने अपने गीत , मुक्तक एवं छंदों से गोष्ठी को सरसता प्रदान कर समापन की घोषणा की। आदरणीय स्वामी जी ने सभी आगन्तुक कवि जनों को सुन्दर प्रस्तुति करण के लिये शुभाशीष प्रदान किया। गोष्ठी के आयोजक बशिष्ठ पान्डे ने आभार व्यक्त किया। इस आयोजन में गोविंद तिवारी व अर्जुन श्री वास्तव का उल्लेख नीय योग दान रहा।

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