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भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम जयंती पर विचार एवं गोष्ठी का आयोजन

जितेंद्र चंद्रवंशी-दुद्धी, सोनप्रभात(सोनप्रभात)

 

  • परशुराम जन-जन के आदर्श किसी जाति,धर्म,पंथ के नहीं – जिला सहसंघचालक

 

दुद्धी,सोनभद्र-भगवान विष्णु जी के छठवें अवतार परशुराम जी का अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विचार एवं गोष्ठी का आयोजन डॉ राजेंद्र प्रसाद पुस्तकालय भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिलासह संघचालक नंदलाल एडवोकेट की अध्यक्षता में विचार एवं गोष्टी के आयोजन में जिला सहसंघचालक ने कहा कि भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम पिता की आज्ञा पालक पुत्र जिन्होंने अपनी माता का सिर पिता की आज्ञा पर काटा।

बाद में भगवान द्वारा वरदान मांगे जाने पर पुनः अपनी माता को जीवनदान देने का प्रसंग का वर्णन किया।परशुराम जन जन के आदर्श हाय हमें उनके अच्छाइयों को आत्मसात करना चाहिए।

21 बार धर्म की रक्षा के लिए क्षत्रिय विहीन पृथ्वी को किया,साथ ही वैश्विक महामारी करोना में हम सभी सुरक्षित हैं यह भगवान का आशीर्वाद है आगे भी हम लोग सावधानी बरतें का संदेश दिया।क्रय विक्रय समिति के अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद राय ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान सभी के होते हैं उन्हें जाति विशेष से जोड़ कर देखना समाज में उनके कद को कम करने जैसा है।स्वतंत्र पत्रकार समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि भगवान शिव की कृपा से परशुराम जी को परशु प्रदान हुआ जन्म से उनका नाम राम था बाद में भगवान शिव की कृपा से प्राप्त परशु (फरसा ) जुड़कर परशुराम नाम पड़ा।

जब भगवान शिव से मिलने परशुराम जी गए तो गणेश भगवान मैं स्वभाव से क्रोधी परशुराम को पिता भगवान शंकर जी से नहीं मिलने दिया था जिस पर परशुराम जी ने भगवान गणेश जी का दांत तोड़ा जिसके कारण भगवान गणेश एकदंत कहलाए।

पिनाक नामक धनुष सीता स्वयंवर में तोड़े जाने व समाजवाद समतामूलक समाज जाति प्रथा की कुरीतियों के साथ ही साथ अन्य समसामयिक विषय पर भी प्रकाश डाला गया। सिविल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जवाहर लाल अग्रहरि ने कहा कि अक्षय तृतीया के दिन ही परशुराम जी का जन्म, एवं आज ही के दिन त्रेता युग का प्रारंभ आदि के कारण अक्षय तृतीया जो कभी क्षय नहीं होता आदि विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला।

 

अवधेश कुमार जयसवाल उनके आदर्शों को अपनाने की बात कही। इस मौके पर गोष्ठी का संचालन कर रहे शिव शंकर गुप्त एडवोकेट ने कहा कि वैश्विक महामारी करोना में विष्णु भगवान के छठ में अवतार परशुराम जी के माता ऋषि पिता और उनके कार एवं स्वभाव का समीक्षात्मक वर्णन करते हुए हमारे सनातन संस्कृति के द्वारा उच्च आदर्शों के मानक को विरासत में प्रदान किए गए विचारों पर चलने की जोरदार वकालत की और सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया गया।

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