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एकलव्य विद्यालय को चालू करे सरकार, आइ.पी.एफ. ने मुख्यमंत्री को भेजा पत्र ।

सोनभद्र – आशीष गुप्ता / सोन प्रभात

सोनभद्र,
एकलव्य आवासीय विद्यालय पिपरखांड, राजकीय इण्टर कालेज गुरमुरा, राजकीय माडल आवासीय विद्यालय मेडरदह, कुलडोमरी और राजकीय डिग्री कालेज बभनी में अतिशीध्र पठन पाठन प्रारम्भ कराने की मांग को लेकर आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा।

आइपीएफ नेता दिनकर कपूर द्वारा भेजे पत्र में सीएम के संज्ञान में जनपद में दलित आदिवासी बच्चों के सामने अध्ययन में आ रही दिक्कतों को पुनः लाते हुए अवगत कराया गया कि सरकारी दुर्व्यवस्था के कारण दलित आदिवासी बच्चे अपनी पढाई बीच में छोड़ दे रहे है। सरकार दुर्व्यवस्था का एक उदाहरण कोन ब्लाक के पिपरखांड गांव में निर्मित एकलव्य आवासीय विद्यालय की बंदी है। ज्ञात हो कि यह आवासीय विद्यालय सोनभद्र के आदिवासियों को सस्ती व सुलभ शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए 3 फरवरी 2011 से पिपरखांड गांव में निर्मित कराया जा रहा है। इस विद्यालय में अभी तक 1137.46 लाख रूपए खर्च किए गए इसके अतिरिक्त विद्युतीकरण व बाउंड्रीवाल आदि के लिए 401.09 लाख रूपए खर्च किए गए है। विद्यालय दो वर्ष से पूर्णतया बनकर तैयार है लेकिन पठन पाठन अभी भी शुरू नहीं हो पाया है। यही स्थिति चोपन ब्लाक के गुरमुरा में निर्मित राजकीय इण्टर कालेज की भी है यह भी निर्मित होकर चार वर्षो से पठन पाठन के अभाव में बर्बाद हो रहा है। इसके नवनिर्मित भवन में पेड़ पौधे जम रहे है और वहाँ पर कमरे खण्डहर में तब्दील हो रहा है। बभनी ब्लाक के परसाटोला में सरकारी डीग्री कालेज का निर्माण सपा सरकार के कार्यकाल से जारी है जो आज तक पूर्ण नहीं हो सका है। म्योरपुर ब्लाक के ग्रामसभा कुलडोमरी के मेडरदह में राजकीय माडल आवासीय विद्यालय बनकर तैयार है लेकिन इसमें भी पठन पाठन शुरू नहीं कराया गया है।

इन सरकारी विद्यालयों में पठन पाठन शुरू न कराने से सोनभद्र के आदिवासी, दलित बच्चों की गहरी क्षति हो रही है। ऐसी स्थिति में अनुरोध किया गया कि सम्बंधित अधिकारियों को विद्यालयों में पठन पाठन शुरू करने का निर्देश देने का कष्ट करे ताकि आदिवासियों व दलितों को निःशुल्क और सुलभ शिक्षा उपलब्ध हो सके।
साथ ही यह भी पुनः संज्ञान में लाया गया कि उत्तर प्रदेश की कोल आदिवासी जाति और चंदौली जनपद की गोंड़, खरवार, चेरो आदिवासी जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा नहीं मिला जिससे इनके बच्चे जनजाति को मिल रही शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ नहीं प्राप्त कर पा रहे है। अतः इन जातियों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने के लिए आवश्यक विधिक, विधायी और प्रशासनिक कार्यवाही करने का आपकी सरकार कष्ट करे।

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