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या देवी सर्व भूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।

सोन प्रभात – डिजिटल डेस्क / सुरेश गुप्त “ग्वालियरी” – सोन प्रभात

विक्रम संवत २०७८ प्रतिपदा, दिन गुरुवार नव रात्र व्रत का प्रथम दिन है, शारदीय नवरात्र की प्रथम आराध्य देवी माता शैल पुत्री है!! माता का यह रूप अनेकानेक नामों से जाना जाता है; सती,पार्वती,दुर्गा, उमा,अपर्णा,गौरी,महेश्वरी,शिवांगी,पर्वत वासिनी!! पूर्व जन्म में इनके पिता राजा दक्ष थे।

राजा दक्ष ने यज्ञ में दामाद शिव को आमंत्रित नहीं किया,परंतु सती भगवान शंकर के बिना स्वीकृति के पिता के यहां चली गई,परंतु यज्ञ स्थल पर अपने तिरस्कार एवम शिव का आसन न देखकर कुपित सती यज्ञ अग्नि में कूद पड़ी, इससे शिव की समाधि भंग हुई तो अपने गण वीर भद्र को भेजा जिन्होंने यज्ञ शाला का विध्वंस किया और सती के जलते शरीर को लेकर चल पड़ा।धरती पर सती के अंग जिस जिस स्थान पर गिरे, वहां शक्ति पीठ स्थापित हो गए।

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