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प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहा कई आवास आधा- अधूरा.

Dala – Sonbhadra ( Anil Agrahari / Sonprabhat) 

डाला सोनभद्र।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहा कई आवास आधा- अधूरा पड़ा है।पहले किस्त के बाद दूसरे किस्त के इंतजार बैठे लाभार्थी अब हतास व निरास हो गये हैं।जिसको लेकर लोग जिम्मेदारो को कोसते नजर आ रहे हैं।
चोपन ब्लाक का कोटा ग्राम पंचायत इन दिनो सरकारी योजनाओं को समय से क्रियान्वित न करा पाने व आधा-अधूरा पड़ा निर्माण कार्यो को लेकर चर्चा में बना हुआ है।जिससे सरकार की किरकिरी हो रही है।आदिवासी ग्रामीण बाहुल्य कोटा ग्राम पंचायत में पक्का मकान का सपना संजोय बैठे लाभार्थियो में हतासा व निराशा छाया हुआ है।कोटा निवासी दीपक पुत्र लाल बहादुर,जहगिरिया पत्नी लक्ष्मण ,हीरावती पत्नी मथुरा शिवकुमारी पत्नी स्व.प्रेमनाथ,पारस पुत्र बासदेव निवासी गुरमुरा,दीनानाथ केवट पुत्र दु:खी,संजू देवी पत्नी विजय कुमार आदि लोगो ने बताया कि पहला किस्त मिला था ।जिससे नीव व पीलर तैयार किया जा चूका है।दो माह से अधिक का समय बित चूका है।लेकिन दूसरा किस्त अभी तक नहीं आया है।

इसी प्रकार बाबुलनाथ व उर्मिला पत्नी जगेश्वर ने बताया कि उसे दूसरा किस्त मिला है।लेकिन तिसरा किस्त अभी तक नहीं मिला है।कोटा निवासी शिव अभिलास पुत्र रामलखन,राजकुमार पुत्र गुपूत, रामकेश्वर पुत्र दीनानाथ ने बताया कि तीनो किस्त मिल चुका है ।लेकिन पाँच- छ माह बितने के बाद भी मजदूरो की मजदूरी का मिलना अभी बाकी है।प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन किस्तो में पक्का मकान निर्माण का कार्य पुरा हो जाता है।इसके बाद सबसे अन्त में मजदूरो की मजदूरी मिलती है।एक नंबर वार्ड के ग्राम पंचायत सदस्य कन्हैया लाल ने बताया कि आवास योजना के तहत लाभार्थी को एक लाख तीस हजार रूपये तीन किस्तो में मिलता है।जिसमें पहला किस्त 44 हजार रूपये,दूसरा किस्त 76 हजार रूपये व तिसरा किस्त 10 हजार रूपये के रूप में मिलता है। मकान का पुरा निर्माण होने पर समस्त मजदूरो की मजदूरी 18450 रूपये मिलता है।जितने बार किस्त मिलता है।उतने बार मकान निर्माण की प्रगति का फोटो खिचकर सम्बंधित विभाग में भेजा जाता है।तब अगला किस्त आता है।अबतक किस्त क्यों नहीं आया है।इसकी पुरी जानकारी नहीं है।

कोटा ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आधा-अधूरा पड़े आवासो का अगला किस्त जल्द लाभार्थी तक पहुँच जाएगा।पैसा के अभाव में आवास लाभार्थियो को अगला किस्त नहीं मिल पा रहा था।चाहे मजदूरो की मजदूरी ही क्यों न हो।

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