कला एवं साहित्य

दुद्धी कवि सम्मेलन – 36वाँ कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं से खूब वाह-वाही लूटी। पढ़े पूरी खबर –

  • दुद्धी कवि सम्मेलन – “निर्माणों के पावन युग में संस्कृति का सम्मान न भूले,हम चरित्र निर्माण न भूले “- माननीय राम शकल सांसद।
  • “हंस वाहिनी मेरा वीणा में झंकार दो,हर दिशा में गूंजे ऐसा प्यार दो ” – कवयित्री डॉक्टर सुमन दूबे (श्रृंगार रस )

दुद्धी – सोनभद्र / जितेंद्र चंद्रवंशी (सोन प्रभात) 

दुद्धी सोनभद्र 36 वां भारतीय कवि सम्मेलन एवं मुशायरा के आयोजन के बीच लोक संस्कृति की राजधानी तुल्य दुद्धी की पावन धरा पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकप्रिय राज्यसभा सांसद माननीय राम शकल द्वारा अद्भुत भारतीय सनातन परंपरा व सामाजिकता की प्रासंगिकता से ओतप्रोत मर्मस्पर्शी कविता ” निर्माणों के पावन युग में, संस्कृति का सम्मान न भूलें, हम चरित्र निर्माण न भूले, हम राष्ट्र का गुणगान न भूलें ” आदि पंक्तियों के गीत सुरीले अंदाज में प्रस्तुत कर भौतिक जीवन की भाग दौड़ में जीवन यापन के उत्सुक लोगों को अपनी मूल संस्कृति का एहसास कराया l

मुख्य संरक्षक दुद्धी विधायक हरिराम चेरो द्वारा अनवरत सामाजिक सद्भावना और संप्रदाय जाति से ऊपर उठकर सद्भावना का अनवरत 36 वर्षों से संदेश के बीच आयोजित कार्यक्रम की मुक्त कंठ से प्रशंसा कर आयोजक को धन्यवाद ज्ञापित किया l कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सदर विधायक दुद्धी सोनभद्र के माटी के लाल भूपेश चौबे द्वारा दुद्धी के सर्वांगीण विकास का सूचक समाज में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व संस्कृति का उत्थान करने में अपना अमूल्य योगदान देने वाले लोगों का मंच द्वारा सम्मानित को दुद्धी के सर्वांगीण विकास का सूचक बताया l

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक सनातन परंपरा अनुसार वीणा वादिनी ज्ञान की देवी मां सरस्वती के वंदना गीत कवयित्री डॉक्टर सुमन दुबे द्वारा ” हंस वाहिनी मेरा वीणा में झंकार दो, हर दिशा में गूंजे ऐसा मां प्यार दो की प्रस्तुति कोकिल स्वर में कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई l तत्पश्चात हास्य -व्यंग, बिरह, श्रृंगार रस, की मानों श्रृंखला के बीच एक से बढ़कर एक प्रस्तुतीकरण कर कार्यक्रम में समां बांध दिया।

लाजवाब प्रस्तुतीकरण डॉ सुमन दुबे, मुंबई से पधारे व्यंगकार कवि दिनेश बावरा, प्रयागराज से श्लेष गौतम, दिल्ली की सरजमी से पधारे हसन सोनभद्री, कवि संकल्प देवव्रत ( दुद्धी एसडीएम), उन्नाव जिले से पधारे कविआलोक कुमार, घर की तुलसी के समान कवि डॉक्टर लखन राम जंगली, बाराबंकी से पधारे हास्य कवि प्रमोद कुमार पंकज,म्योरपुर से पहुंचे युवा कवि यथार्थ विष्णु, पंडित अखिलेश द्विवेदी, आदि कवियों के द्वारा वैश्विक महामारी कोरोना के दर्द से लेकर, राष्ट्रीयता से ओतप्रोत, विभिन्न कवि, कवयित्रियों के विहंगम संगम का समावेश स्वरचित लेखों के माध्यम से समाज का दर्पण प्रस्तुत कर मार्ग प्रशस्त किया l

 

इस मौके पर समाज में उल्लेखनीय योगदान के लिए रामलीला नाटक मंडली व्यासपीठ के पंडित प्रेम चंद मिश्र जी को प्रशस्ति पत्र, व अंग वस्त्र देकर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों के द्वारा सम्मान किया गया, शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान को लेकर सेवानिवृत्त हिंदी विषय के प्रवक्ता रामजीत यादव को प्रशस्ति पत्र एवम अंगवस्त्रम देकर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि गणों के द्वारा सम्मान किया गया l

साथ ही उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन में 5 वर्षों तक रोजगार परक शिक्षा द्वारा निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान कराए जाने को लेकर टी पी दीपक कुमार तिवारी को प्रशस्ति पत्र एवं अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया, कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत विद्या की अधिष्ठात्री देवी मां शारदे के प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्पांचन व दीप प्रज्वलन कर मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथिगणों द्वारा सनातन परंपरा का निर्वाह किया गया l

किसी को करो चारागर धीरे-धीरे  बसाओ मोहब्बत का घर धीरे-धीरे…
नफरतों की लपटें उठने लगी है ,क्यों जल रहा है ये नगर धीरे-धीरे…

 

आदमी के जहर का असर देखने अब सांप जाने लगे गांव से शहर धीरे-धीरे।
अब चोरियां हवाएं भी करने लगी है ,हो रही खिड़कियों को खबर धीरे-धीरे…

न थी तुमसे उम्मीद ऐसी जरा भी बदल जाओगे इस कदर धीरे धीरेे, दबा और कुचला गरीबों का तबका अमीरों की लेगा खबर धीरे-धीरे…

हँसो न जवानों तुम्हारी भी होगी बुढ़ापे में टेढ़ी कमर धीरे-धीरेे , अगर कुछ नहीं है तो मेथी चबा लो चली जाएगी ये शुगर धीरे-धीरे ।

किसी को करो चारागर धीरे-धीरे,बसाओ मोहब्बत का घर धीरे धीरे…

– संकल्प देवव्रत (एसडीएम दुद्धी )

 

आयोजक मंडल कौमी एकता समिति दुद्धी के द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों का अंगवस्त्रम एवं माल्यार्पण कर अभिवादन कर अतिथि देवो भवः का पालन परंपरा अनुसार किया गया l इस मौके पर 1984 से अब तक 36 वां कौमी एकता एवं मुशायरा के मूल में सहयोगी, महेशानंद भाई जी, डॉक्टर लवकुश प्रजापति, जगदीश्वर प्रसाद जयसवाल, एवं स्वर्गीय डॉक्टर भगवान सिंह, स्वर्गीय बी साहब, स्वर्गीय डॉक्टर पी एन सिंह सरीखे हस्तियों को संस्कृति की राजधानी बनाए जाने में अमूल्य योगदान की स्मृतियों को याद किया गया l शानदार प्रस्तुतीकरण के बीच हास्य व्यंग के ठहाकों के बीच जमकर श्रोता रात भर वाह क्या बात है, के अंदाज में मदमस्त दिखे l

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