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जल जंगल जमीन और पर्यावरण का संरक्षण हम सबकी जिम्मेवारी – वनवासी सेवा आश्रम

दुद्धी – सोनभद्र / जितेंद्र चंद्रवंशी – सोन प्रभात

  • राजशाही समय में जँगलो का ज्ञान महलों तक पहुंचाने से मजबूत था भारत!


दुद्धी सोनभद्र तहसील अंतर्गत बनवासी सेवा आश्रम के प्रांगण में आश्रम के अध्यक्ष और सोनभद्र के प्रख्यात साहित्यकार श्री अजय शेखर जी ने शिक्षा निकेतन गोविंदपुर के छात्रों को गांधी जी के विचार जैसे सत्य, अहिंसा, सदाचार, नैतिकता की राह को जीवन मे उतारने का आह्वान किया। साथ ही बताया कि आज सिर्फ गांधी विचार से ही गांवों और जंगलो को विनाश से बचाया जा सकता है।

भारत की पुरातन सांस्कृतिक ज्ञान और त्याग की जीवनशैली की विरासत को पुनः समाज मे स्थापित सिर्फ गांधी जी के दिखाए मार्ग से ही संभव होगा। आज का समाज विघटनकारी है, समाज को तोड़ रहा है। विकास की परिभाषा सिर्फ धन लोलुप्सा की चाह में बड़ी बड़ी कंपनियों और शहरों के चकाचौधं के लिए धनी व्यक्तियो की सेवा के लिए ही सीमित हो रहा है। इससे हमारे गांव और जंगल उजड़ रहे है। सोनभद्र के अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि बच्चो यहां के घने जंगल तब लाह, चिरौंजी जैसे तमाम वन उत्पाद पूरे देश मे प्रसिद्ध थे लेकिन आज बड़े कंपनियों की वजह से यह सब नष्ट हो गए। साथ मे ये भी बताया कि हमारे जंगलों में बहुत से औषधि गुण वाले जड़ी बूटियां भी समाप्त हो गए।
बताया कि बच्चों भारत देश की सनातनी सांस्कृतिक चेतना तो जंगलो में ही बसते थे। जंगल मे ही गुरुकुल होते थे और ऋषियों ने हमे जीवन मूल्यों की शिक्षा जो कि त्याग और तपस्या के आधार पर होती थी वह इन्ही जंगलो से पूरे संसार मे प्रसारित होती थी।
फिर कहते है कि जंगल की कुटी में त्याग और तपस्या में रात ज्ञानी ऋषियों के किसी भी आदेश को धनी राजा भी मना नही कर सकते थे। कुटी ही भव्य महलो और नगरो को संचालित करते थे।
लेकिन बच्चो आज की शिक्षा में त्याग और ज्ञानी लोगो को हीनता में डाल कर सिर्फ लालची और धनी की श्रेष्ठता सिद्ध करने लगी है। कुछ धनी लोग अब पूरे समाज को संचालित कर रहे है जो विनाशकारी और विघटनकारी है।


अंत मे बच्चों से आह्वान किया कि गांधी विचारो पर चलने का संकल्प करो और अपने गांव और जंगल बचाओ। मौके पर विमल भाई, देवनाथ भाई, इंदुबाला सिंह, प्रमोद श्रर्मा, दिवाकर शर्मा, राम नारायण भाई आदि रहे।

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