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सोनभद्र – दहेज हत्या में दोषी पति को उम्रकैद।

  • 20 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
  • सास-ससुर को 3-3 वर्ष की कैद व 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा
  • उर्मिला हत्याकांड का मामला।

सोनभद्र – सोन प्रभात / राजेश पाठक

सोनभद्र। साढ़े पांच वर्ष पूर्व हुई उर्मिला हत्याकांड के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय राहुल मिश्रा की अदालत ने सोमवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी पति रामसूरत को उम्रकैद व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। तथा सास हिरवा व ससुर राधेश्याम को 3-3 वर्ष की कैद एवं 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर 9-9 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।


अभियोजन पक्ष के मुताबिक पन्नूगंज थाने में दी तहरीर में शाहगंज थाना क्षेत्र के सहुआर गांव निवासी गुलाब पुत्र स्वर्गीय बेचन ने आरोप लगाया था कि उसने अपनी बेटी उर्मिला की शादी वर्ष 2012 में पन्नूगंज थाना क्षेत्र के महेवा गांव निवासी रामसूरत पुत्र राधेश्याम के साथ किया था। जब दूसरे वर्ष गौना होने पर बेटी विदा होकर अपनी ससुराल गई तो वहां पर पहले सबकुछ ठीक रहा, लेकिन बाद में ससुराल वाले दहेज में बाइक की मांग को लेकर बेटी को प्रताड़ित करने लगे। जब बाइक देने में असमर्थता जताई गई तो 2 मार्च 2016 को जहर देकर उसका पति रामसूरत, ससुर राधेश्याम व सास हिरवा ने हत्या कर दिया। दूसरे दिन उसके पति रामसूरत ने फोन से मृत्यु की सूचना दिया। बावजूद इसके कोई कार्रवाई नहीं हुई तब एसपी सोनभद्र को रजिस्टर्ड डाक से सूचना दिया, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब न्यायालय में धारा 156(3) सीआरपीसी के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया।

कोर्ट के आदेश पर पन्नूगंज पुलिस ने दहेज हत्या में एफआईआर दर्ज कर लिया और पुलिस विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत पाए जाने पर विवेचक ने न्यायालय में पति,सास व ससुर के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी पति रामसूरत को उम्रकैद व 20 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।तथा सास हिरवा व ससुर राधेश्याम को 3-3 वर्ष की कैद एवं 6-6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 9-9 माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी विजय यादव ने बहस की।

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