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बैरखड़ में रंगोत्सव पर उड़े अबीर व गुलाल,ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक खेली होली।

दुद्धी – सोनभद्र / जितेंद्र चंद्रवंशी – सोन प्रभात

दुद्धी/ सोनभद्र। विविधताओं के देश में स्थान बदलने के साथ-साथ बोली, परंपराएं और रहन-सहन का तरीका भी बदल जाता है फिर होली मनाने की दिन क्यों न हो । तहसील क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य गावों में होली मनाने की परम्परा शुरू हो गई और यह तीन दिनों तक चलेगी, जिसमे कही आज होली मनाई जा रही है तो कही कल मनाई जाएगी तो कहीं परसो भी ।इसी क्रम में बैरखड़ ग्राम में आज होली बड़े धूम धाम से मनाई जा रही है।जबकि मधुबन में मंगलवार व नगवा गांव में बुधवार को होलिका दहन का कार्यक्रम होगा।

इन क्षेत्रों में जिंदा होली खेलने की परम्परा की मान्यता बताई जाती है कि वर्षो पूर्व होली के दिन किसी अनहोनी घटना में कई लोग एक साथ मर गए थे तब से आदिवासी धर्माचार्यों ने होली मनाने की परंपरा नियत तिथि से पूर्व मनाने की सलाह दी जो आज तक कायम है।
बैरखड़ मे आदिवासियों द्वारा परम्परा के साथ जिंदा होली मनाई गई ।वहां मानर की थाप पर होली खेलने की परम्परा आज भी कायम है। क्षेत्र के आदिवासी प्राकृतिक रंग पलाश के फूल से रंगो की होली खेलते हैं या परंपरा दशकों पुरानी है। बैरखड़ गांव आदिवासी जनजाति बाहुल्य गांव हैं ।यहां के निवासी हर त्योहार अपने परम्परा एवं रीति रिवाज के अनुसार मनाते हैं।वैसे भी इस जनजाति का इतिहास प्राचीन काल तक जाता है। ये लोग समूह में इकट्ठा होकर एक-दूसरे को अबीर लगाते है और मानर नामक वाद्ययंत्र की धुन पर नृत्य करते हैं। इस नृत्य में महिलाएं भी शामिल रहती हैं।

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