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विजयगढ के लाल के ‘न्यायाञ्जनम्’ प्रोजेक्ट को शिक्षा मन्त्रालय ने किया स्वीकृत, बढाया सोनभद्र का मान।

सोनभद्र – सोन प्रभात / जितेंद्र चंद्रवंशी – आशीष गुप्ता


सोनभद्र जनपद के विजयगढ क्षेत्र में जयमोहरा गांव के निवासी श्री राम प्रसाद मिश्र के पुत्र के डॉ. मुनीश कुमार मिश्र को शिक्षा मन्त्रालय, भारत सरकार और ‘All India Council for Technical Education’ के ‘भारतीय ज्ञान परम्परा’ परियोजना के अन्तर्गत प्रस्तावित न्यायान्जनम् प्रोजेक्ट के लिये चयन किया गया है| प्रोजेक्ट में चयनित होने की सूचना मिलने पर गांव-घर में खुशी का माहौल है| डॉ. मुनीश मिश्र न्यायान्जनम् प्रोजेक्ट का चयन होने से बहुत हर्षित हैं| उन्होने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा परियोजना के अन्तर्गत कार्य करना उनके लिये बडे सौभाग्य की बात है| वह अपने को अत्यन्त सौभाग्यशाली मानते हैं कि अत्यन्त कठिन न्याय-वैशेषिक दर्शन को प्रौद्योगिकी तकनीकी के द्वारा एक नवीन व सरलतम रूप में समाज को प्रस्तुत करने का अवसर प्राप्त हुआ है|

डॉ. मिश्र ने इसका श्रेय माता-पिता- के त्याग-सहयोग, बाबा विश्वनाथ की कृपा और गुरुजनों के आशीर्वाद को दिया है|
इस परियोजना के अन्तर्गत डॉ. मुनीश मिश्र जी ने न्याय-वैशेषिक दर्शन पर आधारित (न्यायाञ्जनम्) Indian Logic Assistance Tool नामक अपना शोध प्रस्ताव संस्था को भेजा था, जिसे तीन चरण की उच्च स्तरीय चयन समिति के मूल्याङ्कन और साक्षात्कार के बाद स्वीकृत किया गया| इस परियोजना में देशभर से लगभग ४०० विद्वानों ने प्रोजेक्ट के लिये आवेदन किया था, जिसमें से मात्र १४ प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिली है| परियोजना में चयनित प्रस्तावों को बुधवार को शाम ४ बज़े घोषित किया गया| यह परियोजना दो वर्ष के लिये है जिसमें आने वाले खर्च को IKS द्वारा अनुदान दिया जायेगा|
डॉ. मुनीश मिश्र एक अत्यन्त साधारण परिवार से हैं, घर-गृहस्थी का एकमात्र साधन खेती ही है| अभी भी गांव में इनका कच्चा मकान ही है| घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने से बचपन में ही इनको गुरुकुल में संस्कृत शिक्षा के लिये भेज दिया गया था| तब से घर से बाहर रहकर ही पूरी शिक्षा प्राप्त करते हुये बीएचयू से पीएचडी किये| अध्ययन के दौरान अनेकों परेशानियां घर में आयीं किन्तु घरवालो ने उन स्मस्याओ को कभी अपने पुत्र के अध्ययन में बाधा बनने नहीं दिया| घरवालो को अपने लाडले की सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा है जिससे पक्के घर में जा सके| इनके पिताजी ने बताया कि जमीन बहुत ज्यादा है नहीं, सरकारी आवास के लिये अभीतक कोई मदद मिली नहीं और बैंक से लोन भी नहीं मिल रहा है जिससे पक्का घर बन सके| किसी तरह आधा बनवाया, अब बस लडके की नौकरी ही सहारा है, हो जाती तो छत ढलवा देते| हालांकि इस प्रोजेक्ट में वेतन नहीं मिलेगा, कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलेग, किन्तु प्रोजेक्ट के मिलने से ‘डूबते को तिनके का सहारा’ की तरह नौकरी मिलने की एक आस जग गयी है| डॉ. मुनीश मिश्र के इस प्रोजेक्ट के चयन से पूरे के विजयगढ व सोनभद्र जनपद का मान बढ गया है|
प्रोजेक्ट के बारे में बात करने पर उन्होने बताया कि वैशेषिक दर्शन प्राचीन भारतीय भौतिक विज्ञान है, जिसमें परमाणु, पञ्चभूत, सृष्टि प्रक्रिया आदि का सूक्ष्म विवेचन है| न्याय दर्शन में प्रत्यक्ष-अनुमान आदि प्रमाणों का गहन चिन्तन किया गया है| नव्यन्याय जो दोनों दर्शनों के सिद्धान्तों के समावेश के साथ बना है, जिसकी भाषाशैली एक विशिष्ट शब्दावली पर आधारित है, जो पूर्णरूप से गणितीय पद्धति पर आश्रित है, जो कि एक पूर्ण वैज्ञानिक भाषा है| जिस प्रकार से चिकित्सा विज्ञान अथवा विज्ञान के क्षेत्र में एमिनेशन चलचित्र द्वारा सम्पूर्ण चिकित्सकीय विधि या वैज्ञानिकी संरचनाओं का दिखया जाता है, उसी प्रकार इस प्रोजेक्ट के द्वारा न्याय दर्शन की भी दृश्य-श्रव्य सामग्री का निर्माण किया जायेगा, जो सरलतम रूप से भारतीय भौतिक विज्ञान के स्वरुप को जानने समझाने में सहायक होगी| साथ ही नव्य न्याय के लक्षण परिष्कर पद्धति को भाषा सहायक सामग्री (टूल) बनाया जायेगा जो विभिन्न लक्षणों के परिष्कर पद्धति को सरलतम रूप में समझाने में सहायक होगी|
डॉ. मुनीश मिश्र ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से शास्त्री, आचार्य व पीएचडी की शिक्षा प्राप्त की है तथा विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान भी अनेकों महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारियों व कार्यों को सफल रूप से सम्पादित किया है| जैसे- आप युवा महोत्संव (स्पन्दन) के चार बार टीम लीडर रहे, आपको छात्र परिषद् BHU में प्रोग्राम कोअर्डिनेटर रहे| छात्र सद्भावना कमेटी के सदस्य रहे| आपके द्वारा ही महामना मालवीय जी को भारत रत्न सम्मान देने का अभियान चलाया गया, जिसके चलते २०१४ में भारत सरकार ने महामना को भारत रत्न के सम्मान से विभूषित किया| आपने उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के द्वारा प्रदेश में सरल संस्कृत भाषा का वाराणसी, कौशाम्बी व सोनभद्र के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के अध्यापकों को प्रशिक्षण भी दिया है| आप अपने ट्रस्ट के द्वारा वैदिक शिक्षा के प्रसार-प्रसार के लिये नि:शुल्क वैदिक गुरुकुल का भी संचालन कर रहे थे, जो कोरोना आपदा की वजह से अभी बन्द चल रहा है| आप भागवतपुराण, शिवपुराण आदि का प्रवचन भी करते रहते हैं तथा सनातन धर्म की धार्मिक मन्यताओं के ऊपर सामाजिक-वैज्ञानिक तथ्यों पर आपके लेख भी समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहते हैं|

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