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संपादकीय – देख तमाशा दारू का..

संपादकीय – सुरेश गुप्त “ग्वालियरी” – सोन प्रभात

हमारे जिला सिंगरौली में मात्र दारू से राजस्व कर एक अरब 36 करोड़ का!! नूरा कुश्ती जारी है आबकारी विभाग व दारू ठेकेदारों के बीच!! ठेकेदार कहता है कैसे बेचूं ,पड़ोस के सटे जनपद सोनभद्र में हमारे यहां से काफी सस्ती दारु उपलब्ध है सो हमारी बिक्री मार खाती है, विभाग कहता है बेचो भैया नहीं तो हमारे कर्मचारी बेचेंगे, पर बेचना जरूरी है भाई !! देखिए नूरा कुश्ती चल रही है जीत किसकी होती है, अभी सात समूहों को ठेका मिल गया है वह भी लक्ष्य से ज्यादा अर्थात 57 करोड़ 74 लाख का लक्ष्य और प्राप्त हुआ 11 प्रतिशत ज्यादा!! शेष भी पूर्ण होने के कगार पर है,वैसे भी हमारा जिला राजस्व उगाने में नंबर एक है!! हमारे यहां चाहे इस मद से कोई विकास कार्य हो न हो, प्रदेश को भेजकर हम खुश हो ही लेते है!! इधर प्रदेश में हमारे मामा मुख्य मंत्री कहते हैं, शराब बंदी नही करेगे, हमे राजस्व भी चाहिए!! हमे केवल नशा बंदी अर्थात लोगो को समझाना है भईए ये अच्छी चीज नही है मत पिया करो!! हम बंद भी कर दें तो हमारे पियक्कड़ बंधु अगल बगल से लेकर पीएंगे!!

इससे हमारा नुकसान ही होगा, अनेक विकास कार्य रुक जायेंगे, उधर पूर्व मुख्यमंत्री उमा जी कहती है दुकान बंद करो वरना बेटियां और शांति प्रिय नागरिक तो पत्थर फेकेगे ही!!फिर मत कहना बहिना से भड़काया है!! सो भैया प्रदेश स्तर पर भी नूरा कुश्ती चल रही है!! इधर शहरो में हाल यह है कि महंगा लिया है सो महंगा बेचेंगे ही, जनता चिल्लाए तो चिल्लाए!! अनेक ठेकेदार दुकान खोलने के लिए नई नई जगह खोज रहे है, अनेक ठेकेदार तो जनता की सुविधा के लिए शांति प्रिय बस्तियों व आबादी क्षेत्र में प्रवेश कर चुके है!! मौलाना बस्ती वार्ड 33 के एक वाशिंदे ने बड़े गर्व के साथ बताया कि अब तो हमारी भारी संख्या वाली बस्ती के अंदर दुकान खुल चुकी है!! मैं तो खुश हूं पर मेरी श्री मती जी इसके खिलाफ एक संगठन बनाने में जुट गई है!! मजा यह भी कि सामर्थ्य के अनुसार एक ही दुकान पर देशी विदेशी कोई भी दारू पी सकते हैं!!

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