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दहेज हत्या: दोषी पति-सास को 10-10 वर्ष की कैद।

सोनभद्र – सोन प्रभात / राजेश पाठक

  • 26-26 हजार रुपये अर्थदंड, न देने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी
  • साक्ष्य के अभाव में आरोपी देवर दोषमुक्त
  • गंगोत्री हत्याकांड का मामला

सोनभद्र। नौ वर्ष पूर्व हुई गंगोत्री हत्याकांड के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय राहुल मिश्रा की अदालत ने बुधवार को सुनवाई करते हुए दोषसिद्ध पाकर दोषी पति नंदलाल गुप्ता एवं सास दुर्गावती देवी को 10-10 वर्ष की कैद एवं 26-26 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जबकि आरोपी देवर संजय गुप्ता को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक चोपन थाने में 17 मई 2013 को दी तहरीर में करमा थाना क्षेत्र के सिलहटा गांव की बिमल देवी पत्नी स्वर्गीय बच्चेलाल गुप्ता ने आरोप लगाया था कि उसने अपनी बेटी गंगोत्री उर्फ सरोजा की शादी 29 फरवरी 2012 में चोपन थाना क्षेत्र के मीनाबाजार गांव निवासी नंदलाल गुप्ता पुत्र स्वर्गीय मेवालाल गुप्ता के साथ किया था। शादी के दूसरे दिन सुबह बेटी विदा होकर अपनी ससुराल गई। चार दिन तक पहली बार वहां पर रही। पुनः एक माह बाद विदा होकर ससुराल गई तो पति नन्दलाल गुप्ता, सास दुर्गावती देवी व देवर संजय गुप्ता के द्वारा दहेज में बाइक व सिकड़ी की मांग को लेकर बेटी को प्रताड़ित किया जाने लगा। जबकि शादी में एक लाख रुपये नकद, सिकड़ी, अंगूठी, बर्तन आदि उपहार स्वरूप अपनी सामर्थ्य के अनुरूप दिया गया था। बेटी ने मोबाईल से इस वाकये की जानकारी दी थी। जब दहेज की मांग पूरी नहीं हुई तो 30 अप्रैल 2013 को सभीलोगों ने बेटी को जलाकर मार डाला। बेटी की मौत के बाद सदमा लग गया था जिसकी वजह से ठीक होने पर तहरीर दे रही हूं। इस तहरीर पर पुलिस ने दहेज हत्या में एफआईआर दर्ज कर लिया और पुलिस विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत पाए जाने पर विवेचक ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी पति नंदलाल गुप्ता एवं सास दुर्गावती देवी को 10-10 वर्ष की कैद एवं 26-26 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर एक-एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। वहीं आरोपी देवर संजय गुप्ता को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन अधिकारी विजय यादव ने बहस की।

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