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शर्मनाक – दुद्धी से स्थान्तरित डॉ अंसारी ने एक माह बाद भी जुगेल में नही किया ड्यूटी ज्वाइन।

  •  वैश्विक महामारी कोरोना के प्रकोप में अपने कर्तव्यों का घोर विलोप चिकित्सक द्वारा जानबूझकर किया जा रहा , — मामला गम्भीर जांच का विषय।

जितेंद्र चन्द्रवंशी- सोनप्रभात

दुद्धी/सोनभद्र

दुद्धी ।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जुगेल स्थानांतरित चिकित्सक द्वारा 1 महीने व्यतीत हो जाने के बाद भी ग्राम जुगेल कार्यभार ग्रहण अब तक नहीं किया गया। जबकि वैश्विक महामारी कोरोना में जहाँ चिकित्सक, नर्स, पुलिस , प्रशासनिक अधिकारी , घर परिवार छोड़कर जहां अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभा रहे हैं , वही भगवान का दर्जा प्राप्त एक ऐसे चिकित्सक जिसको ना देश की चिंता ना मरीज की चिंता ,दुर्लभ और किसी अजूबे से कम अगर आंका जाए तो यह गलत नहीं होगा , ज्ञात हो कि मनमाना घर  रहकर महीनों ड्यूटी से नदारद रहने वाले चिकित्सक का दुद्धी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुगेल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थान्तरित कर दिया गया था।परंतु ना ही वह दुद्धी से कार्यमुक्त हुए और ना ही जुगेल में कार्यभार ग्रहण किया।

  • कोविड – 19 में चिकित्सक का अपने कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही जानबूझकर बरती गई जो गंभीर जांच का विषय है । 
  • ना ही चिकित्सक शाह आलम अंसारी दुद्धी सीएचसी से कार्यमुक्त हुए और ना ही जुगैल में जॉइनिंग किया।

दुद्धी चिकित्साधीक्षक डॉ मनोज एक्का का कहना है कि डॉ शाह आलम का रिलीव( अवमुक्त) लेटर बना हुआ है, वह इसे लेने ही नहीं आये हैं। उसी समय से बिना कारण अनुपस्थित चल रहे है।उधर चोपन सीएचसी के चिकित्साधीक्षक डॉ आरएन सिंह का कहना है कि उन्होंने यहां जॉइनिंग नहीं की है,ना ही मेरे पास आये है।

कोरोना महामारी ( कोविड19) महामारी काल में मरीज़ो के लिए भगवान के रूप में जाने जाने वाले चिकित्सक इस बीमारी से बचाने के लिए कोरोना व लोगों के बीच दीवार के जैसे खड़े है,जिन्हें सरकार के साथ ही साथ जनता भी कर्मवीर का तमगा देने लगी है,लेकिन उन्ही चिकित्सकों के बीच एक कर्मवीर ऐसा भी है बिना कारण बताए अपनी नवीन तैनाती लिए जिले से गायब है और स्वास्थ्य विभाग में यह जानकारी तक नहीं है कि ये कहाँ है।

  • सीएमओ एसके उपाध्याय ने मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए ,बताया कि दिखवा रहा हूँ कि ऐसा उन्होंने क्यों किया।

 

  • तबादले पर मुरझा गए थे चिकित्सक के चहेते

काबिल होते हुए भी चहेतों के इशारों अपने जिम्मेदारियों से दूर भागने वाले डॉ शाह आलम का जब सीएमओ एसके उपाध्याय ने तबादला किया था तो डॉक्टर साहब के चहेते मुरझा गए थे कि अब कैसे मोनीपोली की दवाई बेची जाएगी??

जो उन्हें अच्छा खासा मुनाफा दिलवाता था।जो कई दिनों तक स्वास्थ्य महकमा को कोस रहें थे, लोग यहा तक कह रहे थे कि वे मरीज़ो की सेवा लगन से करते थे,उधर प्रबुद्धजनों का कहना है कि मरीज़ो सेवा तो चिकित्सक का धर्म है वह तो आदिवासी पिछड़े क्षेत्र जुगैल में भी की जा सकती थी लेकिन ऐन मौके पर वे अपने चिकित्सक  धर्म को छोड़ जिले से गायब है।

 

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