gtag('config', 'UA-178504858-1'); एनडीपीएस एक्ट: दोषी शंकर को 10 वर्ष की कैद। - सोन प्रभात लाइव
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एनडीपीएस एक्ट: दोषी शंकर को 10 वर्ष की कैद।

सोनभद्र / राजेश पाठक – सोन प्रभात

  • एक लाख रूपये अर्थदंड, न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
  • जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी।
  • सात वर्ष पूर्व 3 किलोग्राम गांजा के साथ राबर्ट्सगंज कोतवाली पुलिस ने पकड़ा था।

सोनभद्र। सात वर्ष पूर्व 3 किलोग्राम गांजा के साथ पकड़े गए दोषी शंकर को दोषसिद्ध पाकर शुक्रवार को सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम खलीकुज्जमा की अदालत ने 10 वर्ष की कैद व एक लाख रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित होगी।


अभियोजन पक्ष के मुताबिक 17 मई 2016 को राबर्ट्सगंज कोतवाली के उपनिरीक्षक अवधेश कुमार यादव पुलिस बल के साथ देखभाल क्षेत्र में निकले थे कि तभी मुखबिर खास के जरिए सूचना मिली कि एक व्यक्ति और एक महिला नशीला सामग्री लेकर काशीराम आवास की तरफ हैं। अगर मौके पर चला जाए तो उन्हें पकड़ा जा सकता है। इस सूचना पर विश्वास करके मुखबिर खास को साथ लेकर उसके बताए हुए स्थल पर पुलिस बल के साथ पहुंचा तो एक व्यक्ति और एक महिला दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों भागने लगे तभी उन्हें पुलिस बल की मदद से दौड़ाकर पकड़ लिया गया। उनकी तलाशी ली गई तो व्यक्ति के पास से 3 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ, जबकि महिला के पास से 29 ग्राम हेरोइन बरामद हुई। पूछताछ के दौरान दोनों ने अपना नाम पता क्रमशः शंकर पुत्र शिवधारी व लीलावती पत्नी शंकर निवासी पूरब मोहाल राबर्ट्सगंज बताया। पुलिस ने क्रमशः शंकर पुत्र शिवधारी का धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट व लीलावती का धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की। मामले की विवेचना के दौरान पर्याप्त सबूत मिलने पर विवेचक ने धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट में शंकर के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल किया था। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान व पत्रावली का अवलोकन करने पर दोषसिद्ध पाकर दोषी शंकर को 10 वर्ष की कैद व एक लाख रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। जेल में बिताई अवधि सजा में समाहित की जाएगी। कोर्ट ने 3 किलोग्राम गांजा को नष्ट करने का आदेश दिया है। अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता शशांक शेखर मिश्र ने बहस की।

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