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Sonbhadra News : एशियन गेम्स में चमका सोनभद्र की माटी का लाल रामबाबू, जीता कांस्य पदक।

सोनभद्र – सोन प्रभात / आशीष गुप्ता / सोन प्रभात

एशियन गेम्स 2023 के पैदल चाल स्पर्धा में सोनभद्र के रामबाबू और मंजू रानी की जोड़ी ने कमाल दिखाया और कांस्य पदक जीता, इस खबर में पूरी जानकारी आपको मिलेगी।सोनभद्र के बहुअरा गांव के भैरवागांधी टोले में एक छोटे से खपरैल के मकान में रहने वाले रामबाबू पिछले साल अचानक से तब चर्चा में आए, जब उन्होंने गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों की पैदल चाल स्पर्धा में नए राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था।और अभी हाल फिलहाल की बात करें तो एशियन गेम्स में 35 किलोमीटर की पैदल चाल स्पर्धा में सोनभद्र के रामबाबू और मंजू रानी की जोड़ी ने संयुक्त टीम के तौर पर कमाल कर दिया। दोनों की जोड़ी को कांस्य पदक मिला है, जो कि सोनभद्र के लिए बड़े गौरव का विषय है।

माता पिता अभी भी कच्चे के घर में रहते हैं, राम बाबू में मनरेगा में काम तक किया है।

एशियन गेम्स से बुधवार की सुबह सोनभद्र के लिए अच्छी खबर आई। जिसमे पैदल चाल की 35 किमी मिक्स्ड टीम स्पर्धा में सोनभद्र के रामबाबू ने मंजू रानी के साथ कांस्य पदक जीता है। रामबाबू के कामयाबी की खबर सुनते ही जिले में खुशी छा गई। मजदूर किसान के बेटे रामबाबू ने इससे पहले राष्ट्रीय खेलों में नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक भी जीता था।

रामबाबू के माता पिता

सोनभद्र जनपदवासियों में खुशी की लहर, गौरवान्वित महसूस के रहे जनपदवासी

एक छोटे से खपरैल के मकान में रहने वाले रामबाबू पिछले साल अचानक से चर्चा में आए थे जब उन्होंने गुजरात में हुए राष्ट्रीय खेलों की पैदल चाल स्पर्धा में नए राष्ट्रीय रिकार्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल किया था। उन्होंने 35 किमी की दूरी महज 2 घंटे 36 मिनट और 34 सेकेंड में पूरी की थी। इससे पहले यह रिकार्ड हरियाणा के मुहम्मद जुनैद के नाम था। राष्ट्रीय खेल में जुनैद को हराकर ही रामबाबू ने स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद 15 फरवरी को रांची में आयोजित राष्ट्रीय पैदल चाल चैंपियनशिप में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2 घंटे 31 मिनट 36 सेकेंड का समय निकाला। 25 मार्च को स्लोवाकिया में अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में प्रतिभाग करते हुए 2 घंटे 29 मिनट 56 सेकेंड में दूरी तय की।

संयुक्त तौर पर जीत के नायक और नायिका

रामबाबू के बारे में थोड़ा और विस्तार से आपको बताऊं तो,
रामबाबू ने मधुपुर में पढ़ाई के दौरान ही एथलीट बनने का सपना देखा था। इसे पूरा करने के लिए उन्होंने गांव के कच्चे चकरोड पर अभ्यास शुरू कर किया। उनके पिता छोटेलाल कृषि मजदूर के रूप में काम करते हुए बेटे को हरसंभव प्रोत्साहित करते रहे। कठिन परिश्रम से गांव के पगडंडी से निकल कर रामबाबू राष्ट्रीय फलक पर छाने में कामयाबी पाई।सोनभद्र की माटी के लाल राम बाबू को इस उपलब्धि पर सोन प्रभात टीम बधाई देती है, और भविष्य में और नई उपलब्धियां पाने हेतु शुभकामनाएं ज्ञापित करती है।

विडियो यहां :

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