April 4, 2025 11:12 PM

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Sonbhadra News : जिलाधिकारी कार्यालय का बजट व्यय और अवशेष राशि को लेकर फैली गलतफहमी, वरिष्ठ कोषाधिकारी ने दी जानकारी

Sonbhadra News | Sonprabhat Digital Desk

सोनभद्र। जिलाधिकारी कार्यालय के बजट संबंधी आंकड़ों को लेकर हाल ही में कुछ समाचार पत्रों में एक गलत जानकारी प्रकाशित हुई थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि “जिलाधिकारी कार्यालय ने 6.46 अरब रुपये सरेंडर कर दिए”। इस खबर को लेकर जिले में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।

अब इस विषय पर वरिष्ठ कोषाधिकारी इन्द्रभान सिंह ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि प्रकाशित समाचार पूरी तरह से गलत और तथ्यों से परे है। उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों द्वारा बार-बार मांगी जा रही जानकारी के क्रम में लिपिकीय त्रुटि के कारण गलत आंकड़े अनधिकृत रूप से बिना हस्ताक्षर के उपलब्ध करा दिए गए थे। इस वजह से बजट से संबंधित गलतफहमी उत्पन्न हुई।

कैसे हुई लिपिकीय त्रुटि?

वरिष्ठ कोषाधिकारी ने बताया कि बजट के आंकड़ों को मैन्युअली संकलित कर सही जानकारी प्रेषित की गई थी, लेकिन कंप्यूटर टाइपिंग के दौरान लिपिकीय गलती से कुछ अतिरिक्त शून्य (Zero) जुड़ जाने के कारण बजट की राशि में भारी अंतर दिखाई देने लगा। इस कारण 6.46 अरब रुपये (₹646 करोड़) की राशि को ‘सरेंडर बजट’ के रूप में दर्शा दिया गया, जो कि वास्तविकता से कोसों दूर है।

उन्होंने बताया कि जिस धनराशि को ‘सरेंडर’ बताया गया है, वह वास्तव में सायं 7 बजे की स्थिति में उपलब्ध अवशेष बजट था, जबकि बिलों के पारण (Payment Processing) की प्रक्रिया जारी थी। अतः यह राशि स्वतः ही नियमानुसार व्यय में परिवर्तित हो जानी थी।

वास्तविक बजट की स्थिति क्या है?

वरिष्ठ कोषाधिकारी इन्द्रभान सिंह ने जिलाधिकारी कार्यालय के आवंटित, व्यय किए गए और अवशेष बजट की सही स्थिति को स्पष्ट किया:

  • आवंटित बजट: ₹71,10,58,321 (71.10 करोड़ रुपये)

  • अब तक व्यय किया गया बजट: ₹64,36,70,520 (64.36 करोड़ रुपये)

  • अवशेष बजट: ₹6,73,87,801 (6.73 करोड़ रुपये)

इस आंकड़े से साफ है कि कोई भी 6.46 अरब (₹646 करोड़) की राशि सरेंडर नहीं की गई है, बल्कि यह पूरी तरह से एक लिपिकीय त्रुटि के कारण फैली गलत सूचना थी।

क्या कहता है सरकारी नियम?

सरकारी वित्तीय नियमों के अनुसार, सरेंडर (Surrender) की प्रक्रिया वित्तीय वर्ष के अंत में होती है, जब कोई विभाग आवंटित राशि का पूरा उपयोग नहीं कर पाता। उस स्थिति में शेष धनराशि शासन को वापस कर दी जाती है। लेकिन इस मामले में कोई सरेंडर नहीं हुआ, बल्कि बजट से जुड़े बिलों के भुगतान की प्रक्रिया जारी थी।

कोषाधिकारी ने की अपील : “तथ्यों को सही परिप्रेक्ष्य में समझें”

वरिष्ठ कोषाधिकारी ने समाचार पत्रों और आम जनता से इस गलतफहमी को दूर करने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय जानकारी प्रकाशित करने से पहले सही स्रोत से पुष्टि करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गलत खबरों से जनता और प्रशासन के बीच अनावश्यक भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे बचा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि बजट से संबंधित सभी प्रक्रियाएं पारदर्शिता के साथ की जाती हैं और कोई भी संदेह होने पर संबंधित कार्यालय से सही जानकारी ली जा सकती है।

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