संपादकीय : डिजिटल डर का धंधा और कानून की दस्तक : “फोन पर CBI और जेब पर सीधा वार – साइबर ठगी का नया चेहरा है।”

कभी अपराधी अंधेरे में वार करते थे, आज वे मोबाइल स्क्रीन की रोशनी में डर फैलाते हैं। कभी धमकी आमने-सामने दी जाती थी, आज वह अनजान कॉल बनकर आती है। सोनभद्र में सामने आया ताज़ा साइबर ठगी का मामला केवल एक महिला के साथ हुआ अपराध नहीं है, बल्कि यह समाज के हर मोबाइलधारी नागरिक के लिए चेतावनी है।

म्योरपुर की एक महिला को फोन पर खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर डराया गया—गालियाँ, जान से मारने की धमकी, न्यूड फोटो वायरल करने का भय। यह सुनने में जितना घिनौना है, उतना ही खतरनाक भी। क्योंकि यहाँ हमला शरीर पर नहीं, मन और आत्मसम्मान पर किया गया।

सवाल उठता है—

  •  क्या कानून इतना कमज़ोर है कि कोई भी फोन पर वर्दी पहन ले?
  •  क्या तकनीक इतनी बेलगाम हो गई है कि AI से इज़्ज़त गढ़ी और बिगाड़ी जा सके?

इन सवालों के बीच राहत की बात यह है कि सोनभद्र पुलिस ने इस बार सिर्फ मामला दर्ज कर फाइल नहीं बढ़ाई, बल्कि कानपुर तक जाकर जड़ पर प्रहार किया। चार अभियुक्तों की गिरफ्तारी यह संदेश है कि साइबर अपराधी चाहे कितनी भी तकनीक सीख लें, कानून उनसे एक कदम आगे रहेगा—अगर इच्छाशक्ति हो।

यह मामला यह भी उजागर करता है कि साइबर ठगी अब अकेले-अकेले नहीं होती, यह पूरा नेटवर्क है—
लालच में लिए गए सिम कार्ड,पीओएस मशीनों का दुरुपयोग, AI से गढ़ी गई फर्जी तस्वीरें, और डर के सहारे की गई उगाही।

सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इस गिरोह ने 100 से अधिक सिम कार्डों से देशभर में लोगों को शिकार बनाया—और सोनभद्र भी इससे अछूता नहीं रहा।

ठगी का ‘स्टार्टअप मॉडल’: लालच, सिम और AI

पूछताछ में जो निकला, वह चौंकाने वाला है—

  • आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड

  • पीओएस मशीन से वैध-अवैध एक्टिवेशन और ठगों तक सप्लाई।

  • अश्लील वीडियो के बहाने जाल, फिर AI से फर्जी न्यूड फोटो बनाकर ब्लैकमेल।

  • ब्लॉक नंबरों को “गुमशुदा” दिखाकर दोबारा एक्टिवेट
    अब तक 100+ सिम कार्ड, और देशभर में ठगी की वारदातें—यह अपराध नहीं, उद्योग बन चुका था।

सोनभद्र भी निशाने पर—और जाँच जारी

जाँच में सामने आया है कि सोनभद्र के कई लोग इस गैंग का शिकार हुए। पुलिस नेटवर्क के विस्तार और अन्य पीड़ितों की पहचान में जुटी है। यह लड़ाई लंबी है, लेकिन शुरुआत ठोस है।

याद रखें:

  • कोई भी एजेंसी फोन पर धमकी देकर पैसे नहीं मांगती।

  • “न्यूड फोटो” की धमकी = ब्लैकमेल—डरें नहीं, रिपोर्ट करें।

  • अनजान कॉल, OTP/लिंक = नो एंट्री

  • सिम/दस्तावेज़ किसी के नाम पर देने से पहले सोचें—आज उसका, कल आपका नंबर।

सोन प्रभात की स्पष्ट राय

साइबर अपराध का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, हमारी चुप्पी है। और उसका सबसे बड़ा दुश्मन है—तुरंत शिकायत। अगर कोई आपको डराता है—
तो डरें नहीं। अगर कोई आपको बदनाम करने की धमकी देता है— तो झुकें नहीं। कानून आज भी आपके साथ है, बस आपको पहला कदम बढ़ाना होगा।

सोन प्रभात न्यूज़ मानता है कि डिजिटल युग में सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, यह सामूहिक जागरूकता का अभियान है।  डर को आगे मत बढ़ाइए, कानून को आगे बढ़ाइए।

संपादक
सोन प्रभात न्यूज़
(जनहित में जारी संपादकीय)

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