म्योरपुर: मून स्टार इंग्लिश स्कूल में दो दिवसीय इन-सर्विस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ, प्रथम दिवस सफलतापूर्वक संपन्न.

म्योरपुर (सोनभद्र) | आशीष गुप्ता / Sonprabhat News

म्योरपुर स्थित मून स्टार इंग्लिश स्कूल (Moon Star English School) में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय इन-सर्विस प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका प्रथम दिवस सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, प्रभावी कक्षा संचालन एवं परीक्षा प्रबंधन की बेहतर समझ प्रदान करना रहा।


कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ विद्यालय की प्रधानाचार्या रूपा मिश्रा द्वारा किया गया। इस अवसर पर विद्यालय परिवार के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।


प्रथम दिवस में प्रशिक्षक दीपक राय द्वारा सत्र का संचालन किया गया, जिसमें कक्षा संयोजन (Class Management), परीक्षा संचालन (Exam Handling) एवं शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने गतिविधि आधारित शिक्षण (Activity-Based Learning) पर विशेष जोर देते हुए बताया कि कैसे छात्रों की सहभागिता बढ़ाकर उनके सीखने की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सकता है। कार्यशाला के पहले सत्र में प्रशिक्षक दीपक राय ने परीक्षा संबंधी महत्वपूर्ण दिशानिर्देश साझा किए। उन्होंने छात्रों के रिकॉर्ड संधारण, अकादमिक प्रदर्शन के विश्लेषण एवं शिक्षण कार्य को सुव्यवस्थित और योजनाबद्ध तरीके से संचालित करने के प्रभावी उपायों पर प्रकाश डाला।


इसके अतिरिक्त, ऑफिस इंचार्ज अविनाश कुमार ने छात्रों के प्रवेश (Admission Process) एवं डाक्यूमेंटेशन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार सही दस्तावेज़ प्रबंधन से विद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।


वहीं, रोहित सिंह ने U-DISE एवं APAR से संबंधित विषयों पर अपने विचार साझा करते हुए शिक्षकों को इनकी उपयोगिता और सही संचालन के बारे में जानकारी दी।


उप-प्रधानाचार्या प्रियंका सिंह ने आगे स्कूल की गतिविधियों—विशेष रूप से प्रार्थना सभा (Assembly) से लेकर छात्रों की शैक्षणिक प्रगति तक—पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शिक्षकों की जटिल समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करते हुए उन्हें स्पष्ट दिशानिर्देश प्रदान किए, जिससे शिक्षण कार्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।


कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और भविष्य में भी इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन निरंतर किया जाएगा।

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