नव रात्रि (द्वितीय दिवस) -नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
लेख – सुरेश गुप्त “ग्वालियरी” – सोन प्रभात सत,चित,आनंदमय ब्रह्म की प्राप्ति कराना ही ब्रह्म चारिणी का स्वभाव है!! मां का यह स्वरूप सच्चरित्र की प्रेरणा देता है। मां के ब्रह्म चारिणी स्वरूप की पूजा नव रात्रि के दूसरे दिन की जाती है!! मां का यह स्वरूप हमें सच्चरित्र की प्रेरणा देता है, चरित्र वान…




















