तीन दोहे:- सुरेश गुप्त “ग्वालियरी”
सोनप्रभात – कला एवं साहित्य खाली बोतल हाथ में, सूखा पड़ा गिलास!! आजा बादल झूम के, मन है आज उदास!! खेत नदी तालाब के, प्यासे सूखे होंठ!! खड़ा पेड़ भी रो रहा, ले पत्तों की ओट!! बहुत शरारत हो चुकी, तरस रहे अब नैन! बरसो प्यारी बादरी, मिल जाये कुछ चैन!! Sonprabhat Live…

