सोनभद्र | सोनप्रभात
रिपोर्ट: वेदव्यास सिंह मौर्य
सोनभद्र । जिले के नगवां ब्लॉक में ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है, जिसमें एडीओ पंचायत की संलिप्तता और संरक्षण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सरकारी धन के दुरुपयोग, विकास कार्यों में अनियमितता और सामुदायिक शौचालयों के नाम पर घोटाले की खबरें जोरों पर हैं। खासकर, ग्राम पंचायत नंदना में हुए भ्रष्टाचार को लेकर शिकायतें आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई गई थीं, लेकिन जांच में अनियमितता बरती गई और शिकायतकर्ता को ही गलत साबित कर दिया गया।
शिकायतों को दबाने का आरोप
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत नंदना में सरकारी धन के दुरुपयोग और गलत इस्तेमाल को लेकर बीते महीने कई मीडिया संस्थानों में खबरें प्रकाशित हुई थीं। इसके बाद, मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी इस मामले की शिकायत की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए उपनिदेशक पंचायती राज मंडल, मिर्जापुर ने डीपीआरओ सोनभद्र को जांच के लिए नामित किया। डीपीआरओ ने एडीओ पंचायत नगवां को जांच का जिम्मा सौंपा, लेकिन जांच में पक्षपात किए जाने का आरोप है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच से पहले ही एडीओ पंचायत ने ग्राम प्रधान के खिलाफ साक्ष्य देने की मांग की, जबकि सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड ब्लॉक स्तर पर ही उपलब्ध थे। इसके बावजूद, ग्राम प्रधान के पक्ष में झूठी रिपोर्ट लगाकर उन्हें निर्दोष साबित कर दिया गया।
ग्राम प्रधान के निजी लाभ के लिए सरकारी धन का दुरुपयोग
शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों के अनुसार, ग्राम प्रधान ने सरकारी धन का उपयोग अपने निजी हितों के लिए किया। उन्होंने अपने खेत में सरकारी बोरिंग का इस्तेमाल सिंचाई के लिए किया, वहीं अपने सगे संबंधियों के निजी घरों तक सरकारी धन से सीसी रोड बनवाई गई, जिसका काफी हद तक भुगतान भी किया जा चुका है। लेकिन एडीओ पंचायत की जांच में ये सभी अनियमितताएँ नजरअंदाज कर दी गईं।

सामुदायिक शौचालयों पर बड़ा घोटाला
विकास खंड नगवां में सरकार द्वारा सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया है, जिनका संचालन पंचायत स्तर पर एक समूह के माध्यम से किया जाता है। इसके लिए भारी भरकम राशि जारी की जाती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि लगभग आधे से अधिक पंचायतों में बने शौचालय कभी खुले ही नहीं। सवाल उठता है कि जब शौचालय उपयोग में नहीं आ रहे हैं, तो इनका बजट किसकी जेब में जा रहा है?
सफाई कर्मियों की गैरमौजूदगी, लेकिन वेतन जारी
सूत्रों के मुताबिक, नगवां ब्लॉक के आधे से अधिक गांवों में सफाई कर्मी नियमित रूप से ड्यूटी पर नहीं जाते, फिर भी उन्हें वेतन का भुगतान हो रहा है। बिना किसी जांच-पड़ताल के वेतन जारी किए जाने से स्पष्ट होता है कि इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।
डीपीआरओ ने नहीं दिया जवाब
जब इस मामले में डीपीआरओ सोनभद्र से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अधिकारियों को सीयूजी नंबर पर कॉल रिसीव करने का सख्त निर्देश दिया गया है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी सरकार के आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ उठने लगी आवाज
सूत्रों के अनुसार, एडीओ पंचायत पर आरोप है कि उन्होंने ग्राम प्रधानों और अन्य भ्रष्ट अधिकारियों से सांठगांठ कर मोटी रकम लेकर पक्षपातपूर्ण जांच रिपोर्ट तैयार की। अब इस मामले में शिकायतकर्ता जल्द ही जिलाधिकारी सोनभद्र से मिलकर उच्चस्तरीय जांच की मांग करेंगे। साथ ही, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने हेतु जनता दरबार में जाने की योजना बनाई जा रही है। बहुत जल्द एक प्रतिनिधिमंडल इस मुद्दे को लेकर लखनऊ रवाना होगा।

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