Sonbhadra News : जिला कारागार में बंद हेरोइन आरोपी की मौत, अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम.

5 जनवरी को 20.70 ग्राम हेरोइन के साथ मां सहित हुआ था गिरफ्तार. 8 जनवरी को कराए गए मेडिकल परीक्षण में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया था बंदी. इंजेक्शन के जरिए नशे का सेवन करने का था आदी, लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहा था. मृतक की मां पानपत्ती देवी और भाई भी हेरोइन बिक्री के आरोप में जेल में बंद.

सोनभद्र। Sonprabhat News
जनपद सोनभद्र के जिला कारागार गुरमा में निरुद्ध हेरोइन बिक्री के आरोपी 26 वर्षीय राधेश्याम यादव की बुधवार देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गई। जेल प्रशासन द्वारा आनन-फानन में उसे राजकीय मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना से जेल प्रशासन और बंदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।


हेरोइन के साथ हुई थी गिरफ्तारी

पुलिस के अनुसार, नगर के उरमौरा मोहाल निवासी राधेश्याम यादव को 5 जनवरी को उसकी मां पानपत्ती देवी के साथ 20.70 ग्राम हेरोइन के साथ गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही राधेश्याम जिला कारागार गुरमा में निरुद्ध था, जबकि उसकी मां भी फिलहाल जेल में बंद है।


एचआईवी पॉजिटिव और नशे का आदी था बंदी

कारागार अधीक्षक अरुण कुमार मिश्रा ने बताया कि 8 जनवरी को कराए गए मेडिकल परीक्षण में राधेश्याम एचआईवी पॉजिटिव पाया गया था। साथ ही वह लंबे समय से नशे का आदी था और इंजेक्शन के माध्यम से ड्रग्स का सेवन करता था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उसकी बिगड़ती हालत का संबंध उसकी पुरानी बीमारी और नशे की लत से हो सकता है, हालांकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।


एक ही परिवार पर नशे का साया

इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि राधेश्याम की मां पानपत्ती देवी और उसका भाई भी हेरोइन बिक्री के आरोप में जेल में निरुद्ध हैं। एक ही परिवार के कई सदस्यों का नशे के अवैध कारोबार से जुड़ा होना सामाजिक तंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय माना जा रहा है।


जांच के आदेश, प्रशासन ने दिए आश्वासन

जेल प्रशासन ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। पुलिस प्रशासन भी पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है।


नशा: व्यक्तिगत नहीं, सामाजिक संकट

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि नशे की समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर गंभीर चुनौती बन चुकी है। समय रहते प्रभावी कदम न उठाए गए तो इसके परिणाम और भी भयावह हो सकते हैं।

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