Sonbhadra News | Vinod Gupta
बीजपुर (सोनभद्र): कंपोजिट विद्यालय बीजपुर एक बार फिर विवादों में है, और इस बार निलंबित प्रधानाध्यापक द्वारा कंपोजिट ग्रांट के धन का आहरण किए जाने का मामला सुर्खियों में आया है। यह मामला तीन महीने पहले निलंबित हुई प्रधानाध्यापक आशारानी से जुड़ा है, जिन पर गोपनीय तरीके से बैंक से एक लाख रुपये का धन निकालने का आरोप है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब विद्यालय की एसएमसी अध्यक्ष सुधा देवी ने मीडिया को जानकारी दी और इस मामले का खुलासा किया।
क्या है पूरा मामला?
एसएमसी अध्यक्ष सुधा देवी ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में बताया कि निलंबित प्रधानाध्यापक आशारानी और विद्यालय के एक शिक्षक ने उन्हें बरगला कर बैंक ले जाया, जहां से कंपोजिट ग्रांट का एक लाख रुपये निकालने के लिए उनसे हस्ताक्षर कराए गए। उनका कहना है कि यह धनराशि विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर निकाली गई थी। जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया, और उच्च अधिकारी भी इसकी जांच करने के लिए सक्रिय हो गए।

प्रशासनिक अनियमितताएँ और जाँच का दबाव
एसएमसी अध्यक्ष के खुलासे के बाद यह मामला धीरे-धीरे उच्चाधिकारियों तक पहुँच चुका है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशासन इस मामले को दबा देगा या फिर कंपोजिट ग्रांट का गलत उपयोग करने वाले अधिकारियों और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, शिक्षा विभाग में एक बार फिर उठापटक मच गई है, और उच्च अधिकारी यह तय करने में जुटे हैं कि क्या इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विद्यालय में चल रही समस्याएँ
कंपोजिट विद्यालय बीजपुर के शिक्षकों द्वारा एबीएसए (ब्लॉक शिक्षा अधिकारी) पर साजिश और षड्यंत्र जैसे आरोप लगाए गए थे। इसके बाद, विद्यालय की तीन वरिष्ठ शिक्षिकाओं—संध्या, सरोज और शीलम—ने लिखित आदेश मिलने के बावजूद वित्तीय प्रभार लेने से इनकार कर दिया था। वहीं, वरिष्ठ शिक्षक नारायण दास गुप्ता ने विद्यालय का प्रभार लेने की कोशिश की, लेकिन बीईओ ने कुछ जांच आख्या के आधार पर उन्हें दूसरे विद्यालय में संबद्ध कर दिया और मूल विद्यालय से हटा दिया।
आशारानी का पक्ष
निलंबित प्रधानाध्यापक आशारानी ने इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने उच्चाधिकारियों के मौखिक निर्देश पर ही 31 मार्च तक विद्यालय का कंपोजिट ग्रांट लैप्स (समाप्त) होने से बचाने के लिए बैंक से धन निकाला था। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में सभी साक्ष्य वे जांच के दौरान पेश करेंगे।
बीईओ की प्रतिक्रिया
इस मामले पर बीईओ विश्वजीत कुमार ने कहा कि निलंबित कर्मचारी या अधिकारी धन नहीं निकाल सकते हैं, और उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जांच कराई जाएगी और मामले की पूरी छानबीन की जाएगी।
क्या होगा आगे?
अब यह देखना होगा कि क्या प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करेगा या इसे केवल जांच के नाम पर दबा दिया जाएगा। तीन महीने से प्रधानाध्यापक विहीन चल रहे इस विद्यालय के बच्चों का भविष्य अब इस मामले के परिणामों पर निर्भर करेगा।

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