April 3, 2025 10:43 AM

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Surya Grahan 2025 : 29 मार्च को साल का पहला सूर्य ग्रहण, खगोलीय संयोग और धार्मिक महत्व

Surya Grahan 2025 : 29 मार्च 2025 को साल का पहला सूर्य ग्रहण और चैत्र अमावस्या का दुर्लभ संयोग, खगोल प्रेमियों और आध्यात्मिक आस्थावानों के लिए महत्वपूर्ण—हालांकि भारत में दृश्यता न होने के कारण धार्मिक प्रभाव सीमित रहेगा।

Sonprabhat Digital Desk

Surya Grahan 2025 | साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को पड़ने जा रहा है, जो खगोल विज्ञान और ज्योतिषीय दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। यह ग्रहण चैत्र अमावस्या के दिन पड़ेगा, जिससे यह खगोलीय और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष बन गया है। इस दौरान वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को आंशिक रूप से ढक देगा, जिससे आकाश में “आग के छल्ले” का दृश्य निर्मित होगा।

हालांकि यह खगोलीय घटना भारत में दिखाई नहीं देगी, लेकिन इसका प्रभाव ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुछ राशियों पर पड़ सकता है। ग्रहण के कारण उत्पन्न होने वाली धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए इस घटना को गहराई से समझना आवश्यक है।


सूर्य ग्रहण 2025 : समय और स्थान

यह ग्रहण भारतीय समयानुसार दोपहर 2:20 बजे शुरू होगा और शाम 6:16 बजे समाप्त होगा। हालांकि, यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, लेकिन उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों में इसे स्पष्ट रूप से देखा जा सकेगा। विशेष रूप से पश्चिमी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में रहने वाले खगोल प्रेमियों के लिए यह एक दुर्लभ दृश्य होगा।


धार्मिक और ज्योतिषीय प्रभाव

भारत में यह ग्रहण अदृश्य रहने के कारण, हिंदू पंचांग के अनुसार इसे ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष प्रभावकारी नहीं माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि इस बार सूर्य ग्रहण के दौरान सूतक काल मान्य नहीं होगा, जो आमतौर पर ग्रहण के 12 घंटे पहले से शुरू होकर इसके समाप्त होने तक जारी रहता है।

हालांकि, कुछ ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि ग्रहों की यह स्थिति कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जबकि कुछ राशियों को इसका सकारात्मक प्रभाव मिल सकता है।


चैत्र अमावस्या का महत्व

चैत्र अमावस्या हिंदू पंचांग के अनुसार नए साल की शुरुआत का प्रतीक होती है और इसे पूर्वजों को तर्पण अर्पित करने, आध्यात्मिक साधना और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है। इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और पितरों को श्रद्धांजलि देने की परंपरा है। ग्रहण के साथ इसका संयोग धार्मिक दृष्टि से चर्चा का विषय बन गया है, लेकिन भारत में ग्रहण दृश्य न होने के कारण चैत्र अमावस्या से जुड़े सभी अनुष्ठान सामान्य रूप से संपन्न होंगे।


वैज्ञानिक दृष्टिकोण

खगोलशास्त्रियों के अनुसार, सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आकर सूर्य को आंशिक या पूर्ण रूप से ढक लेता है। इस बार का सूर्य ग्रहण वलयाकार होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाएगा, जिससे “आग के छल्ले” जैसी आकृति दिखाई देगी। हालांकि, यह भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए खगोलीय दृष्टि से भारतीय जनता के लिए यह महत्त्वपूर्ण दृश्य नहीं होगा।


क्या करें और क्या न करें?

हालांकि भारत में ग्रहण के धार्मिक प्रभाव सीमित रहेंगे, लेकिन ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, इस दौरान कुछ सावधानियां रखना फायदेमंद हो सकता है:

 क्या करें?
  •  पवित्र नदियों में स्नान करें और दान-पुण्य करें।
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ और ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का जाप करें।
  • सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए दीपक जलाएं और घर की सफाई करें।
 क्या न करें?
  •  ग्रहण के दौरान भोजन और पानी का सेवन न करें।
  •  सोने और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन से बचें।
  •  महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले ज्योतिषीय परामर्श लें।

अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचना प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएँ व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित हैं। पाठक किसी निर्णय से पहले विशेषज्ञों से परामर्श करें। Sonprabhat News इसकी पुष्टि या जिम्मेदारी नहीं लेता।

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