फेसबुक पर फर्जी बैंक विज्ञापन दिखाकर 12 लाख की ठगी, अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
फेसबुक पर फर्जी बैंक विज्ञापन दिखाकर 12 लाख की ठगी, अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के दो सदस्य गिरफ्तार
8:07 PM, Jun 17, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

सोनभद्र साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, झारखंड से संचालित हो रहा था ठगी का नेटवर्क
दर्जनों एटीएम कार्ड, पीओएस मशीन, मोबाइल फोन और कार बरामद
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सोनभद्र। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सोनभद्र साइबर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने फेसबुक पर बैंक के नाम से फर्जी विज्ञापन दिखाकर 12 लाख रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए झारखंड से दो शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पीओएस मशीन, चार पहिया वाहन, दर्जनों डेबिट-क्रेडिट कार्ड और चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा के निर्देशन तथा अपर पुलिस अधीक्षक (ऑपरेशन) ऋषभ रुणवाल के पर्यवेक्षण में साइबर क्राइम थाना पर दर्ज मुकदमे की जांच के दौरान यह कार्रवाई की गई। मामला आजमगढ़ निवासी एवं वर्तमान में जिला चिकित्सालय सोनभद्र परिसर में रह रहे डॉ. प्रेम बहादुर गौतम से जुड़ा है।पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके फेसबुक अकाउंट पर इंडसइंड बैंक के नाम से पेंशनरों से संबंधित एक विज्ञापन और लिंक दिखाई दिया। बैंक की आधिकारिक सेवा समझकर उन्होंने लिंक खोलकर अपनी बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी साझा कर दी। इसके बाद साइबर अपराधियों ने इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से 5-5 लाख रुपये के दो तथा 2 लाख रुपये के एक ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 12 लाख रुपये उनके खाते से निकाल लिए।मामले की गंभीरता को देखते हुए साइबर थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने बैंक खातों का विश्लेषण, मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग, डिजिटल साक्ष्यों का संकलन तथा सर्विलांस की मदद से आरोपियों की पहचान की। निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार चौधरी के नेतृत्व में टीम झारखंड रवाना हुई और कोडरमा जिले से दो अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया।गिरफ्तार अभियुक्तों में धीरज कुमार निवासी धरगांव फुलवरिया थाना नवलशाही, जिला कोडरमा तथा रवि मेहता निवासी बिगहा फुलवरिया थाना नवलशाही, जिला कोडरमा (झारखंड) शामिल हैं।पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी लोगों को विभिन्न प्रलोभन देकर उनका केवाईसी विवरण प्राप्त करते थे और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। खाते खुलने के बाद पासबुक तो खाताधारकों को दे दी जाती थी, लेकिन डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और अन्य बैंकिंग दस्तावेज अपने पास रख लेते थे। इसके बाद साइबर ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में मंगवाकर एटीएम और अन्य माध्यमों से निकाल लेते थे, जिससे वास्तविक अपराधियों की पहचान छिपी रहे।आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बैंकों और पेंशनरों से संबंधित फर्जी विज्ञापन चलाकर लोगों को झांसे में लेते थे और उनकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देते थे।बरामदगी में एक पीओएस मशीन, एक चार पहिया वाहन, दर्जनों डेबिट एवं क्रेडिट कार्ड तथा चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन शामिल हैं।इस कार्रवाई में प्रभारी साइबर थाना निरीक्षक धीरेन्द्र कुमार चौधरी, हेड कांस्टेबल शिवनंदन सिंह, योगेश यादव, संजय कुमार वर्मा तथा कांस्टेबल सुनील रावत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले किसी भी बैंकिंग लिंक या विज्ञापन पर बिना सत्यापन के अपनी व्यक्तिगत एवं बैंकिंग जानकारी साझा न करें।






