नवरात्र के पांचवें दिन होगी माँ स्कंदमाता की आराधना, जाने कैसे करे पूजा-अर्चना.
सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति के लिए करें माँ स्कंदमाता की उपासना, केले का भोग लगाकर करें कल्याण की कामना.
sonebhadra
9:41 PM, Oct 14, 2026
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Edited By: U. Gupta , Reported By: यू .गुप्ता

सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति के लिए करें माँ स्कंदमाता की उपासना, केले का भोग लगाकर करें कल्याण की कामना
शारदीय नवरात्र के पांचवें दिन माँ दुर्गा के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि की प्राप्ति होती है। माँ का यह स्वरूप वात्सल्य, करुणा और ममता का प्रतीक माना जाता है।
माँ दुर्गा के पांचवें विग्रह स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। देव सेनापति भगवान स्कंद, जिन्हें कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है, की माता होने के कारण देवी का यह नाम पड़ा। भगवान स्कंद ने तारकासुर का वध किया था। माँ स्कंदमाता चार भुजाओं वाली हैं। उनकी गोद में बाल स्वरूप भगवान स्कंद विराजमान रहते हैं। माँ अपने दो हाथों में कमल पुष्प धारण करती हैं, जबकि एक हाथ से भगवान स्कंद को संभालती हैं और दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। उनका वर्ण अत्यंत उज्ज्वल है और वे कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। सिंह उनका वाहन है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र के पांचवें दिन साधक अपना मन विशुद्ध चक्र पर केंद्रित करते हैं। माँ स्कंदमाता की उपासना से साधक को आध्यात्मिक शांति और सकारात्मक चेतना की अनुभूति होती है। भक्त माँ से जीवन में सुख, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
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नवरात्र के पांचवें दिन माँ स्कंदमाता को केला अर्पित करने तथा जरूरतमंदों को प्रसाद वितरित करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है। बुद्धिबल एवं विवेक की वृद्धि के लिए माँ को छह इलायची अर्पित करने तथा सामर्थ्य के अनुसार कन्या को उपहार या आभूषण भेंट करने की भी परंपरा है।
माँ स्कंदमाता का पूजा मंत्र--
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सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रित करद्वया।
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शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी॥
नवरात्र के इस पावन अवसर पर श्रद्धालु माँ स्कंदमाता की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में शांति की कामना करते हैं।






