AAP में बड़ी टूट का दावा: राघव चड्ढा सहित कई सांसदों के BJP में शामिल होने की घोषणा
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने “भारी मन” से यह फैसला लिया है। उनका आरोप है कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों से पूरी तरह भटक चुकी है, जिनके आधार पर इसकी स्थापना हुई थी।
new delhi
4:50 PM, Apr 24, 2026
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Edited by: Ashish Gupta
, Reported By: News Desk

Photo : Sonprabhat News
नई दिल्ली। देश की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब Raghav Chadha ने Aam Aadmi Party (AAP) से अलग होने और Bharatiya Janata Party (BJP) में शामिल होने का ऐलान किया। उनके साथ राज्यसभा सांसद Sandeep Pathak और Ashok Mittal के भी भाजपा में जाने की बात सामने आई है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने “भारी मन” से यह फैसला लिया है। उनका आरोप है कि आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतों और आदर्शों से पूरी तरह भटक चुकी है, जिनके आधार पर इसकी स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि पार्टी की वर्तमान दिशा और कार्यशैली उनके विचारों से मेल नहीं खाती, जिसके चलते उन्होंने अलग रास्ता चुनना उचित समझा।

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चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसदों में से लगभग दो-तिहाई सांसद पार्टी छोड़ने के पक्ष में हैं। उन्होंने बताया कि सात सांसदों ने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया है और ये सभी संवैधानिक प्रावधानों के तहत भाजपा में विलय की प्रक्रिया अपनाएंगे। इस संदर्भ में आवश्यक दस्तावेज राज्यसभा के सभापति को सौंपे जा चुके हैं।
उन्होंने अपने बयान में कहा, “मैं गलत पार्टी में था, इसलिए आज से अपने रास्ते अलग कर लिए हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि हालात ऐसे हो जाएंगे। पार्टी अपने सिद्धांतों से भटक गई है, और अब बदलाव जरूरी है।”
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यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी के संसदीय दल में संभावित बड़ी फूट का संकेत दे रहा है। यदि दो-तिहाई सांसदों का दावा सही साबित होता है, तो यह भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा, जिसका असर आगामी चुनावों और संसद की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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हालांकि, इस पूरे मामले पर आम आदमी पार्टी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह दावा सही होता है, तो यह AAP के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है, खासकर उस समय जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
वहीं भाजपा के लिए यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से फायदेमंद माना जा रहा है, क्योंकि इससे पार्टी को संसद में मजबूती मिल सकती है और विपक्ष की एकजुटता पर भी असर पड़ सकता है।






