दुद्धी की बेटी जीवंतिका का पेकिंग विश्वविद्यालय में पीएचडी के लिए चयन, चीन सरकार देगी पूर्ण छात्रवृत्ति
सोनभद्र। दुद्धी की प्रतिभाशाली बेटी जीवंतिका कुमारी चन्द्रवंशी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनका चयन चीन के प्रतिष्ठित पेकिंग विश्वविद्यालय, बीजिंग में ग्रह विज्ञान (Planetary Science) में पीएचडी के लिए हुआ है। खास बात यह है कि उन्हें चीन सरकार की पूर्ण छात्रवृत्ति भी प्राप्त हुई है।
7:39 PM, Sep 27, 2026
Share:
Edited By: Shaktipal , Reported By: Jitendra Kumar chandrwanshi

ग्रह विज्ञान में करेंगी शोध, चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों और क्रेटरों का करेंगी अध्ययन; उपलब्धि से दुद्धी में हर्ष
दुद्धी, सोनभद्र। दुद्धी की प्रतिभाशाली बेटी जीवंतिका कुमारी चन्द्रवंशी ने अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनका चयन चीन के प्रतिष्ठित पेकिंग विश्वविद्यालय, बीजिंग में ग्रह विज्ञान (Planetary Science) में पीएचडी के लिए हुआ है। खास बात यह है कि उन्हें चीन सरकार की पूर्ण छात्रवृत्ति भी प्राप्त हुई है।जीवंतिका ने 30 अगस्त 2026 की शाम भारत से चीन के लिए प्रस्थान किया और 31 अगस्त की सुबह पेकिंग विश्वविद्यालय पहुंचकर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपने पीएचडी कार्यक्रम में शामिल हुईं। वर्तमान में वह विश्वविद्यालय में अपने शोध एवं अध्ययन कार्य में जुटी हुई हैं।चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों और क्रेटरों पर करेंगी शोधपेकिंग विश्वविद्यालय में जीवंतिका का शोध कार्य चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों, वहां मौजूद क्रेटरों और उनके रडार डेटा के अध्ययन पर केंद्रित रहेगा। उनका शोध क्षेत्र चंद्र रिमोट सेंसिंग और ग्रह विज्ञान से जुड़ा हुआ है।जीवंतिका का उद्देश्य चंद्रमा तथा अन्य ग्रहों की सतह और उनकी संरचना को वैज्ञानिक दृष्टि से बेहतर ढंग से समझना है। इसके माध्यम से वह भविष्य में अंतरिक्ष विज्ञान और ग्रहों के अध्ययन से जुड़े शोध में योगदान देना चाहती हैं।दुद्धी से अंतरराष्ट्रीय शोध तक का सफरजीवंतिका की प्रारंभिक शिक्षा दुद्धी नगर स्थित योरर्स इंग्लिश स्कूल से हुई, जहां उन्होंने एलकेजी से कक्षा चार तक पढ़ाई की। कक्षा चार में उन्होंने 100 प्रतिशत अंक हासिल किए।इसके बाद वर्ष 2014 में उन्होंने कक्षा पांच से सात तक केसरी देवी कनोडिया रेनुकूट कॉन्वेंट स्कूल, सोनभद्र में शिक्षा प्राप्त की। वर्ष 2018 में उन्होंने दुद्धी स्थित जेम्स इंग्लिश स्कूल से कक्षा आठ की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कक्षा नौ से बारह तक उन्होंने डीसी लुईस मेमोरियल स्कूल, मुरधवा, रेनुकूट से शिक्षा प्राप्त की।वर्ष 2021 से 2023 तक उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पृथ्वी विज्ञान विभाग से भू-विज्ञान में बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद वर्ष 2024-25 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी के भू-विज्ञान विभाग से एमएससी की पढ़ाई पूरी की।रिमोट सेंसिंग और ग्रह विज्ञान में बढ़ी रुचिबीएचयू में एमएससी की पढ़ाई के दौरान जीवंतिका की रुचि रिमोट सेंसिंग और जीआईएस के माध्यम से ग्रहों की सतह के अध्ययन में बढ़ी। इसी क्रम में उन्होंने चंद्रमा के रॉबर्टसन क्रेटर के भू-आकृतिक एवं खनिजीय अध्ययन पर शोध कार्य किया।इस शोध पर आधारित उनका एक शोध-पत्र 'एडवांसेज इन स्पेस रिसर्च' जर्नल में प्रकाशित हो चुका है, जिसमें वह सह-लेखक हैं। उनका दूसरा शोध-पत्र फिलहाल पीयर रिव्यू की प्रक्रिया में है।जीवंतिका ने GATE-2026 (Geology and Geophysics) में ऑल इंडिया रैंक 133 भी हासिल की है।शोध-पत्र के बाद विदेश में पीएचडी का रास्ता खुलावर्ष 2025 में शोध-पत्र के प्रकाशन के बाद जीवंतिका ने विदेशों में पीएचडी और शोध के अवसर तलाशने शुरू किए। इसी दौरान उन्हें चीन के प्रतिष्ठित पेकिंग विश्वविद्यालय में ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में पीएचडी का अवसर मिला।चयन के बाद उन्हें चीन सरकार की पूर्ण छात्रवृत्ति प्रदान की गई। प्रवेश पत्र प्राप्त होने के बाद उन्होंने 30 अगस्त की शाम भारत से चीन के लिए उड़ान भरी और 31 अगस्त की सुबह पेकिंग विश्वविद्यालय पहुंचकर दाखिला लिया।परिवार और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेयजीवंतिका अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता ज्योति देवी चन्द्रवंशी, पिता जीवन राम चन्द्रवंशी और परिवार के साथ-साथ अपने शिक्षकों को देती हैं। उनके पिता पेशे से अधिवक्ता हैं।उन्होंने विशेष रूप से अपने एमएससी शोध मार्गदर्शक डॉ. अश्वनी राजू तथा बीएचयू के सभी शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिनके मार्गदर्शन से उन्हें शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली।परिवार ने शिक्षा को दी सर्वोच्च प्राथमिकताजीवंतिका के परिवार ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों की उच्च शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। उनके पिता ने अपने संघर्षों के बीच बच्चों की शिक्षा के लिए निरंतर मेहनत और त्याग किया।उनके बड़े भाई जीवांशु कुमार ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है और उनका कैंपस प्लेसमेंट टीसीएस (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज) में हुआ है।वहीं उनके छोटे भाई जिज्ञांशु कुमार कानपुर स्थित भीमराव आंबेडकर इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं।अंतरिक्ष अनुसंधान में योगदान का लक्ष्यजीवंतिका भविष्य में चंद्र रिमोट सेंसिंग और ग्रह विज्ञान के क्षेत्र में शोध करते हुए चंद्रमा और अन्य ग्रहों की वैज्ञानिक समझ को आगे बढ़ाना चाहती हैं। उनका लक्ष्य अंतरिक्ष विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में सार्थक योगदान देना और अपने परिवार, दुद्धी तथा देश का नाम रोशन करना है।जीवंतिका की इस उपलब्धि से उनके परिवार, शिक्षकों, शुभचिंतकों और दुद्धी क्षेत्र में खुशी का माहौल है। डॉ. लवकुश प्रजापति, हर्षवर्धन प्रजापति, चन्द्रवंशी समाज के जिलाध्यक्ष जितेन्द्र कुमार चन्द्रवंशी सहित क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य और सफल शोध-यात्रा की शुभकामनाएं दी हैं।
यह भी पढ़ें






