Duddhi;दुद्धी की रामलीला में शूर्पणखा की नाक कटी, सीता हरण और राम विलाप देख भावुक हुए श्रद्धालु
दुद्धी (सोनभद्र)। स्थानीय तहसील परिसर में श्री रामलीला नाट्य कला परिषद दुद्धी के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध श्रीरामलीला में बृहस्पतिवार की रात शूर्पणखा की नाक काटने, रावण द्वारा माता सीता के हरण तथा प्रभु श्रीराम के विलाप की लीला का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लीला देखने के लिए तहसील परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़
9:23 PM, Oct 16, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Jitendra Kumar chandrwanshi

दुद्धी (सोनभद्र)। स्थानीय तहसील परिसर में श्री रामलीला नाट्य कला परिषद दुद्धी के तत्वावधान में आयोजित ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध श्रीरामलीला में बृहस्पतिवार की रात शूर्पणखा की नाक काटने, रावण द्वारा माता सीता के हरण तथा प्रभु श्रीराम के विलाप की लीला का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। लीला देखने के लिए तहसील परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।शूर्पणखा प्रसंग से सीता हरण तक का हुआ मंचनलीला के दौरान दिखाया गया कि भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण पंचवटी में निवास कर रहे थे। इसी दौरान रावण की बहन शूर्पणखा वहां पहुंची और भगवान श्रीराम के समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखा। श्रीराम के मना करने पर उसने लक्ष्मण को विवाह का प्रस्ताव दिया। बार-बार हठ करने और माता सीता पर आक्रमण का प्रयास करने पर लक्ष्मण ने क्रोधित होकर उसकी नाक काट दी।अपमानित शूर्पणखा ने अपने भाई रावण को इसकी जानकारी दी। इसके बाद रावण ने माता सीता के हरण की योजना बनाई। योजना के तहत मारीच ने मायावी स्वर्ण मृग का रूप धारण किया। मृग को देखकर माता सीता ने उसे पाने की इच्छा जताई, जिस पर भगवान श्रीराम उसका पीछा करने चले गए। उन्होंने लक्ष्मण को माता सीता की रक्षा के लिए कुटिया में रुकने को कहा।इसी बीच रावण साधु का वेश धारण कर कुटिया पहुंचा और छलपूर्वक माता सीता का हरण कर लंका ले गया। माता सीता की रक्षा के लिए गिद्धराज जटायु ने रावण से युद्ध किया, लेकिन रावण ने उनके पंख काट दिए। गंभीर रूप से घायल जटायु ने बाद में भगवान श्रीराम को सीता हरण की पूरी घटना बताई।सीता वियोग में प्रभु श्रीराम का विलाप देख भावुक हुए दर्शकमंचन में रावण द्वारा माता सीता को लंका की अशोक वाटिका में रखने का प्रसंग भी दिखाया गया। उधर, माता सीता के वियोग में भगवान श्रीराम वन-वन भटकते हुए उन्हें खोजते नजर आए। माता सीता के बिछोह में प्रभु श्रीराम का करुण विलाप देखकर पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे। इस दौरान भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के संवाद तथा माता सीता की खोज में उनकी व्याकुलता का कलाकारों ने प्रभावशाली चित्रण किया।लीला के दौरान माता सीता द्वारा अपने आभूषण नीचे गिराने और उनके सुग्रीव तक पहुंचने का प्रसंग भी दर्शाया गया। अंत में घायल जटायु और भगवान श्रीराम के बीच हुए संवाद के साथ लीला का समापन हुआ। कलाकारों के जीवंत अभिनय और प्रभावशाली संवादों ने रामलीला के वातावरण को भक्तिमय बना दिया।आज राम-सुग्रीव मित्रता, बाली वध और लंका दहन की लीलारामलीला आयोजकों के अनुसार, शुक्रवार को प्रभु श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता, बाली वध तथा लंका दहन की लीला का भव्य मंचन किया जाएगा। रामलीला का संचालन एवं निर्देशन महंत देवेंद्र मिश्रा कर रहे हैं, जबकि व्यास की भूमिका विवेकानंद मिश्रा निभा रहे हैं।ऐतिहासिक रामलीला को लेकर नगर और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।
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