दुद्धी: गार्ड ऑफ ऑनर के बीच गोंडवाना रीति से हुआ पूर्व मंत्री विजय सिंह गौड़ का अंतिम संस्कार, अंतिम दर्शन को उमड़ा जनसैलाब।
दुद्धी / सोनभद्र: जितेन्द्र चंद्रवंशी - आशीष गुप्ता / सोन प्रभात
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7:41 PM, Jan 9, 2026
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Edited by: Ashish Gupta

दुद्धी / सोनभद्र: जितेन्द्र चंद्रवंशी - आशीष गुप्ता / सोन प्रभात
दुद्धी, सोनभद्र।
आदिवासी बाहुल्य दुद्धी विधानसभा क्षेत्र (403) की राजनीति के चार दशकों तक अजेय रहे, आठ बार विधायक एवं पूर्व मंत्री
विजय सिंह गौड़
अब स्मृतियों में शेष रह गए। उनके निधन से पूरे दुद्धी क्षेत्र सहित सोनभद्र और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को उनके पैतृक गांव
कटौली, दुद्धी
में गमगीन माहौल के बीच
गोंडवाना आदिवासी रीति-रिवाजों
के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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अंतिम संस्कार से पूर्व प्रशासन द्वारा दिवंगत नेता को
गार्ड ऑफ ऑनर
प्रदान कर
राजकीय सम्मान
के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को सलामी दी गई, पूरा वातावरण भावुक हो उठा और उपस्थित जनमानस की आंखें नम हो गईं। उनके आवास से कुछ दूरी पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ उन्हें दफनाया गया।

अंतिम दर्शन को उमड़ा राजनीतिक व सामाजिक जगत
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लोकप्रिय जननेता विजय सिंह गौड़ के अंतिम दर्शन हेतु मंत्री, विधायक, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में आम नागरिक पहुंचे। इस दौरान
छत्तीसगढ़ राज्य मंत्री रामविचार नेताम
,
राज्य मंत्री संजीव गोंड
दर्जा प्राप्त मंत्री जीत सिंह खरवार
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रमेश दुबे
बहुजन समाज पार्टी के नेता संजय सिंह गौड़ ध्रुवे
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रामविचार गौतम
सहित अनेक वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। साथ ही छत्तीसगढ़ से भी बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और समर्थक अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे।

जल–जंगल–जमीन की लड़ाई के प्रतीक
विजय सिंह गौड़ केवल एक राजनेता नहीं, बल्कि
जल, जंगल और जमीन
की लड़ाई के मजबूत प्रतीक थे। आदिवासी अधिकारों के लिए उन्होंने सड़क से लेकर
सुप्रीम कोर्ट
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तक संघर्ष किया। जनजातीय सीट के संरक्षण और आदिवासी अस्मिता के लिए उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। उनका सरल, अटल और जमीनी स्वभाव ही था, जिसने उन्हें सत्ता और विपक्ष—दोनों के लिए चुनौती बनाए रखा। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी उनके जनाधार और लोकप्रियता के सामने वर्षों तक असफल होते रहे।

जनसेवा की अमिट छाप
चार दशकों की राजनीतिक यात्रा में उन्होंने दुद्धी क्षेत्र के विकास, आदिवासी समाज के उत्थान और आम जनमानस की समस्याओं को सदैव प्राथमिकता दी। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और बुनियादी सुविधाओं के लिए किए गए उनके प्रयासों को लोग भावभीनी श्रद्धांजलि के साथ याद कर रहे हैं।

शोक में डूबा दुद्धी क्षेत्र
उनके निधन से दुद्धी ही नहीं, बल्कि पूरे सोनभद्र और सीमावर्ती छत्तीसगढ़ क्षेत्र में शोक का माहौल है। हर आंख नम है और हर जुबान पर बस एक ही बात—
विजय सिंह गौड़ जैसे जननेता सदियों में पैदा होते हैं।






