नवरात्र के व्रत में भक्ति के साथ सेहत का भी रखें ध्यान, संतुलित आहार से बनेगी बात.
तली-भुनी चीजों से करें परहेज, फल, दूध और पर्याप्त तरल पदार्थों को आहार में दें जगह
sonebhadra
4:21 PM, Oct 16, 2026
Share:
Edited By: U. Gupta , Reported By: यू.गुप्ता

तली-भुनी चीजों से करें परहेज, फल, दूध और पर्याप्त तरल पदार्थों को आहार में दें जगह
शारदीय नवरात्र में माँ दुर्गा की आराधना के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु व्रत रखते हैं। इस दौरान खान-पान और दिनचर्या में बदलाव होने से सेहत पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में व्रत के दौरान भक्ति के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। सही और संतुलित आहार अपनाकर शरीर को जरूरी पोषण देने के साथ कमजोरी और पाचन संबंधी परेशानियों से बचने में मदद मिल सकती है। नवरात्र के व्रत को कुछ लोग वजन कम करने का तरीका मानते हैं, जबकि कुछ लोगों का वजन इस दौरान बढ़ भी सकता है। इसकी प्रमुख वजह खान-पान में बदलाव और तली-भुनी चीजों का अधिक सेवन हो सकता है। इसलिए व्रत के दौरान भोजन की मात्रा और गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने दें। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने के साथ नारियल पानी, नींबू पानी, दूध और ताजे फलों को आहार में शामिल किया जा सकता है। फल और व्रत में अनुमत सब्जियां शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करने में सहायक होती हैं। वहीं, जिन खाद्य पदार्थों से गैस या पेट संबंधी परेशानी होती है, उनके सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए। व्रत में भी पौष्टिकता और स्वाद का संतुलन बनाए रखा जा सकता है। कुट्टू के आटे से पूरी और पकौड़ी के बजाय रोटी, चीला या डोसा बनाया जा सकता है। इसी तरह साबूदाने की खिचड़ी में मूंगफली और अनुमत सब्जियों का इस्तेमाल किया जा सकता है। उबले आलू की चाट, कम चीनी वाले दूध से बनी खीर और दही में कटे हुए फल मिलाकर खाने जैसे विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं।
भोजन तैयार करते समय तेल, नमक और चीनी की मात्रा सीमित रखना बेहतर है। अधिक तली-भुनी चीजों के बजाय उबले, भुने या कम तेल में बने व्यंजनों को प्राथमिकता देने से खान-पान को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलती है।
व्रत के दौरान लंबे समय तक भूखे रहने या केवल तली-भुनी चीजें खाने से कमजोरी, थकान और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए अपनी शारीरिक जरूरतों के अनुसार आहार लेना जरूरी है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को उपवास रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
विज्ञापन
यह भी पढ़ें
नवरात्र का संदेश केवल आस्था और साधना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी दिनचर्या को बेहतर बनाने का अवसर भी है। ऐसे में माँ दुर्गा की आराधना के साथ संतुलित खान-पान, पर्याप्त पानी और शरीर की जरूरतों का ध्यान रखकर व्रत को अधिक सहज और स्वास्थ्य के अनुकूल बनाया जा सकता है।






