सम्पादकीय –ः कविता (समीक्षा – महंगाई) – सुरेश गुप्त "ग्वालियरी"
सोनप्रभात– कला एवं साहित्य
1:02 PM, Feb 25, 2021
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Edited by: Ashish Gupta

सोनप्रभात– कला एवं साहित्य
सुरेश गुप्त "ग्वालियरी"– विन्ध्यनगर⁄सिंगरौली
समीक्षा- (महंगाई)
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महँगा सब कुछ हो गया, कटहल दस का पाव ! पर नेता के चरित्र का, वही आज भी भाव !! बढा रेट पट्रोल का, बेची अपनी कार ! लाया भैंस खरीद कर , शुरु किया व्यापार !! महँगा सब कुछ हो गया, सस्ता अब भी खून ! दस हजार उसको मिला, बहा सड़क पर खून !! महँगा अब लगने लगा, इन अँखियन का वार ! लेकर गया बजार में, डूबे पाँच हजार!! – सुरेश गुप्त,ग्वालियरी






