ग्रामोत्सव बना सामाजिक परिवर्तन का मंच: गुलालझरिया में नशामुक्ति, कर्जमुक्ति और जागरूकता का दिया गया संदेश
दुद्धी, सोनभद्र। Ashish Gupta / Sonprabhat News
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6:00 PM, Jan 16, 2026
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Edited by: Ashish Gupta

दुद्धी, सोनभद्र। Ashish Gupta / Sonprabhat News
दुद्धी विकासखंड क्षेत्र के गुलालझरिया गांव स्थित पंचायत भवन परिसर में गुरुवार को ग्राम प्रधान त्रिभुवन यादव की पहल पर आयोजित ग्रामोत्सव ग्रामीण समाज में जागरूकता, संवेदना और संस्कारों के पुनर्जागरण का प्रभावी मंच बनकर उभरा। ग्रामोत्सव के माध्यम से आयोजित इस जन-जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य गांव को नशामुक्त, कर्जमुक्त और सामाजिक कुरीतियों से मुक्त करने की दिशा में ठोस पहल करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ, जिसके साथ ही सामाजिक चेतना के इस अभियान की औपचारिक शुरुआत हुई। इसके पश्चात ग्रामोत्सव के अंतर्गत कठपुतली कला, रस्साकसी एवं अन्य लोक-आधारित गतिविधियों के माध्यम से समाज को संदेश दिया गया। कठपुतली कलाकारों ने नशा, दहेज, अंधविश्वास और दिखावटी सामाजिक संस्कारों से होने वाले दुष्परिणामों को प्रभावी और भावनात्मक ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित ग्रामीणों में गहरी संवेदना और आत्ममंथन देखने को मिला।
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ग्रामोत्सव के दौरान गांव के आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों को लगभग 400 कंबल, शाल, टोपी एवं स्वेटर वितरित किए गए। इस पहल को ग्रामीणों ने सर्द मौसम में राहत देने वाली और मानवीय करुणा से जुड़ी पहल बताया। वितरण के समय ग्राम प्रधान ने कहा कि समाज का विकास तभी संभव है जब अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्राम प्रधान त्रिभुवन यादव ने सामाजिक जीवन में बढ़ती फिजूलखर्ची और दिखावे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों में अनावश्यक खर्च से बचें और इसके लिए कर्ज लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगाएं । उन्होंने कहा कि आज के दौर में फिजूलखर्ची के कारण परिवार कर्ज के जाल में फंसते जा रहे हैं, जिससे मानसिक, सामाजिक और आर्थिक संकट गहराता है।

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उन्होंने नशामुक्ति अभियान पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इसमें महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। महिलाएं अपने घर-परिवार से ही नशा, दहेज, अंधविश्वास और फिजूलखर्च जैसी कुरीतियों के खिलाफ अभियान छेड़ सकती हैं। यदि महिलाएं ठान लें तो गांव से नशा जैसी बुराइयों को जड़ से समाप्त किया जा सकता है।
कार्यक्रम में जयमंगल उरेती, जगतनारायण यादव सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सामूहिक रूप से गांव को कर्जमुक्त बनाने , माता-पिता एवं सास-ससुर की सेवा को सामाजिक कर्तव्य मानने, नशामुक्त समाज के निर्माण , संस्कारों में सीमित खर्च तथा शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प दिलाया।

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कार्यक्रम का संचालन दंगल सिंह ने कुशलतापूर्वक किया। मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी का भोग लगाया गया, जिससे आयोजन में सांस्कृतिक और पारंपरिक भावनाओं का समावेश हुआ। इस अवसर पर गांव में कार्यरत अध्यापक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा, एएनएम सहित अन्य कर्मियों को अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे उनके सामाजिक योगदान को सार्वजनिक सम्मान मिला।

कार्यक्रम में लेखपाल विमलेश श्रीवास्तव, आस्था, एएनएम प्रीति सिंह, सीएचओ शिल्पी कुमारी समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे। ग्रामीणों ने ग्रामोत्सव को समाज सुधार की दिशा में एक सशक्त और प्रेरणादायी पहल बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने की आवश्यकता जताई।






