रनटोला जंगल में अवैध कटान: दर्जनों सीधा समेत कई प्रजातियों के पेड़ काटे गए, वन विभाग पर उठे सवाल
वनों की कटाई के खिलाफ पर्यावरण प्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाई आवाज।
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Edited by: Ashish Gupta
, Reported By: Babulal Sharma

रनटोला के जंगलों में कटे पेड़ : फोटो - सोन प्रभात
वन प्रभाग रेणुकूट के म्योरपुर वन रेंज अंतर्गत स्थित रनटोला जंगल में बड़े पैमाने पर अवैध कटान का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार अज्ञात लकड़ी तस्करों ने यहां दर्जनों सीधा (सिद्ध) सहित अन्य बहुमूल्य प्रजातियों के पेड़ों को काट दिया है। इस घटना से न केवल क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन पर खतरा मंडराने लगा है, बल्कि वन विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।स्थानीय पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है।
रनटोला के ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल, सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत दुबे, सुरेश और प्रदीप सिंह ने बताया कि जंगल में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का कट जाना सामान्य घटना नहीं है। उनका कहना है कि यदि वन विभाग द्वारा नियमित गश्त और प्रभावी निगरानी की जा रही होती, तो इस तरह की घटना को रोका जा सकता था। उन्होंने वन कर्मियों पर लापरवाही के साथ-साथ मिलीभगत का भी आरोप लगाया है।विशेषज्ञों के अनुसार सीधा (सिद्ध) की लकड़ी अत्यंत मजबूत, टिकाऊ और बहुउपयोगी होती है। इसका उपयोग मकान निर्माण, दरवाजे-खिड़कियां, बल्लियां, फर्नीचर और कृषि कार्यों में खंभे लगाने जैसे कार्यों में किया जाता है। बाजार में इसकी भारी मांग होने के कारण इसकी कीमत भी अच्छी-खासी होती है। यही वजह है कि लकड़ी तस्कर इस प्रजाति के पेड़ों को खासतौर पर निशाना बनाते हैं और जंगलों में चोरी-छिपे कटान करते हैं।ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद वन विभाग को इसकी भनक तक न लगना कई सवाल खड़े करता है।
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जब इस संबंध में म्योरपुर क्षेत्र के एसडीओ अखिलेश सिंह पटेल से संपर्क किया गया, तो उन्होंने मामले की जानकारी न होने की बात कहते हुए जांच कराने का आश्वासन दिया।गौरतलब है कि इससे पहले भी किरवानी जंगल में इसी तरह सीधा के दर्जनों पेड़ों के कटान का मामला सामने आ चुका है। उस समय भी म्योरपुर रेंजर जबर सिंह यादव को सूचना दी गई थी, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और जंगलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।






