Pradosh Vrat 2025: चैत्र मास का पहला प्रदोष व्रत 27 मार्च को, जानें पूजा विधि और महत्व
सोन प्रभात न्यूज डेस्क
11:34 AM, Mar 22, 2025
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Edited by: Ashish Gupta

सोन प्रभात न्यूज डेस्क
Pradosh Vrat 2025 :
सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है, जो इस बार 27 मार्च 2025 को पड़ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत करने से समस्त भय दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
प्रदोष व्रत की तिथि एवं समय
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वैदिक पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 27 मार्च को रात 01:42 बजे शुरू होगी और इसी दिन रात 11:03 बजे समाप्त होगी। ऐसे में 27 मार्च को ही प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन शिव उपासना का विशेष महत्व होता है और संध्या समय भगवान शिव की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
शिवलिंग पर अर्पित करें ये विशेष चीजें
भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। मान्यता है कि शिवलिंग पर कुछ विशेष सामग्रियां चढ़ाने से जीवन में शुभता आती है और रुके हुए कार्य पूरे होते हैं।
- धतूरा : भगवान शिव को धतूरा अत्यंत प्रिय है। इसे अर्पित करने से साधक की पूजा सफल मानी जाती है।
- चंदन : अभिषेक के बाद शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाना शुभ होता है।
- दीप प्रज्वलित कर आरती : संध्या समय दीपक जलाकर शिव आरती करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
- इत्र अर्पण : शिवलिंग पर इत्र चढ़ाने से जीवन में सफलता और धन वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
- बेलपत्र और भांग : शिवलिंग पर बेलपत्र और भांग चढ़ाने से समस्त संकट दूर होते हैं।
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प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, विधिपूर्वक प्रदोष व्रत करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और साधक को आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान शिव का अभिषेक कर सुख-शांति की कामना करने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
अस्वीकरण:
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इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय विश्लेषण पर आधारित है। पाठकों से अनुरोध है कि इसे अंतिम सत्य न मानें और अपने विवेक से निर्णय लें।
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