जांच में फर्जीवाड़ा साबित, फिर भी न्याय से वंचित पीड़िता,आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप, पात्र महिला दर-दर भटकने को मजबूर
जांच में फर्जीवाड़ा साबित, फिर भी न्याय से वंचित पीड़िता आंगनबाड़ी भर्ती में भ्रष्टाचार का आरोप, पात्र महिला दर-दर भटकने को मजबूर
1:42 PM, May 28, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Naresh gupta

छत्तीसगढ़ की विवाहिता को बनाया गया गांव का निवासी, जांच रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई अधर में
सोनभद्र: बभनी ब्लॉक अंतर्गत असनहर गांव में आंगनबाड़ी भर्ती को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार, फर्जी निवास प्रमाण पत्र और प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जांच में शिकायत सही पाए जाने के बावजूद पात्र अभ्यर्थी को अब तक न्याय नहीं मिल सका है।मामला असनहर प्रथम केंद्र पर आंगनबाड़ी कार्यकत्री के रिक्त पद से जुड़ा है।
गांव की मूल निवासी और पात्र अभ्यर्थी बबिता गुप्ता ने नियमानुसार आवेदन किया था। आरोप है कि ग्राम प्रधान ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपनी पुत्री सुनीता, जिसकी शादी वर्षों पहले छत्तीसगढ़ में हो चुकी है, को लाभ पहुंचाने के लिए फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवा दिया।आरोप है कि स्थानीय लेखपाल की कथित मिलीभगत से जारी इस प्रमाण पत्र के आधार पर सुनीता को प्रथम वरीयता सूची में शामिल कर लिया गया।जब बबिता गुप्ता को इस कथित अनियमितता की जानकारी हुई तो उन्होंने साक्ष्य जुटाने शुरू किए।
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पीड़िता ने सुनीता के विवाह कार्ड, ग्राम प्रतिनिधियों के बयान तथा छत्तीसगढ़ में उसके निवास और बच्चों से जुड़े प्रमाण जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) कार्यालय में प्रस्तुत किए। इसके बावजूद कार्रवाई करने के बजाय उन्हें तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने को कहा जाता रहा।
पीड़िता का आरोप है कि भ्रष्टाचार उजागर होने के बाद अधिकारियों ने उनकी पात्रता समाप्त करने की नीयत से उनका आय प्रमाण पत्र ही निरस्त कर दिया, ताकि वे चयन प्रक्रिया से बाहर हो जाएं।मामला जब जिलाधिकारी के संज्ञान में पहुंचा तो उनके निर्देश पर जांच कराई गई। नायब तहसीलदार जितेंद्र कुमार की टीम द्वारा की गई जांच में शिकायत सही पाई गई। जांच रिपोर्ट संख्या 845/45 में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि सुनीता की शादी लगभग चार वर्ष पूर्व छत्तीसगढ़ में हो चुकी है और वह असनहर गांव की निवासी नहीं है।
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रिपोर्ट में उसके निवास प्रमाण पत्र को भी अवैध बताया गया।हैरानी की बात यह है कि इतनी स्पष्ट जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़िता का आरोप है कि रिपोर्ट को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के बजाय मामले को ऑफलाइन प्रक्रिया में उलझाकर दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
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बबिता गुप्ता का कहना है कि जब वह जांच रिपोर्ट लेकर जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय पहुंचीं तो उन्हें न्याय देने के बजाय पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर नए सिरे से भर्ती कराने की बात कही गई। पीड़िता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की कथित लेन-देन की मंशा पूरी न होने पर अब भर्ती को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी की जा रही है।इस पूरे मामले को लेकर पीड़िता ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है।
उठ रहे हैं कई बड़े सवालजांच में फर्जीवाड़ा साबित होने के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?फर्जी निवास प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर मुकदमा कब दर्ज होगा?पात्र अभ्यर्थी को नियुक्ति देने के बजाय भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने की तैयारी क्यों की जा रही हैक्या सोनभद्र में सरकारी भर्ती प्रक्रियाएं इसी तरह सवालों के घेरे में रहेंगी?






