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बीच जंगल में वनाधिकार पट्टा देने पर भड़का जनाक्रोश, जांच के आदेश।

म्योरपुर/सोनभद्र। प्रशांत दुबे / सोन प्रभात

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9:18 AM, Jan 1, 2026

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Edited by: Ashish Gupta

बीच जंगल में वनाधिकार पट्टा देने पर भड़का जनाक्रोश, जांच के आदेश।
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

म्योरपुर/सोनभद्र। प्रशांत दुबे / सोन प्रभात

म्योरपुर वन रेंज अंतर्गत देवरी ग्राम पंचायत में वनाधिकार अधिनियम के तहत बीच जंगल और मुख्य मार्ग किनारे दिए गए पट्टों को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। कठबंधवा–मुर्धवा बिजपुर मार्ग के किनारे तथा उससे लगभग 400 मीटर पूरब घने जंगल व पौधरोपण क्षेत्र में दो लाभार्थियों को पट्टा दिए जाने का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों ने इसे जंगल के अस्तित्व से खिलवाड़ बताते हुए तत्काल निरस्तीकरण की मांग की है।

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ग्रामीणों ने जिलाधिकारी सोनभद्र एवं मुख्य वन संरक्षक, विंध्याचल मंडल को पत्र भेजकर मांग की है कि उक्त पट्टों को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जंगल को पूर्व की स्थिति में बहाल नहीं किया गया तो वे मजबूरन पूरे वन क्षेत्र में सामूहिक रूप से कब्जा करने को बाध्य होंगे। गांव में आपसी तनाव और विवाद से बचने के लिए नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया कि कठबंधवा सड़क किनारे पिछले 50 वर्षों में कभी किसी का कब्जा नहीं रहा है। न वहां खेती हुई और न ही जोत-कोड का कोई प्रमाण है। आज भी वहां खड़े मोटे और पुराने पेड़ इस बात के साक्ष्य हैं कि यह भूमि हमेशा से वन क्षेत्र रही है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि एक प्रभावशाली और पैसे वाले व्यक्ति को गुपचुप तरीके से बीच जंगल में लगभग एक बीघा भूमि का पट्टा दे दिया गया, जबकि वहां कभी किसी का कब्जा नहीं रहा। आरोप यह भी लगाया गया कि तत्कालीन वन रक्षक और वनाधिकार समिति के सचिव ने भारी रकम लेकर यह पट्टा दिलवाया। हाल ही में जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उनमें जबरदस्त आक्रोश फैल गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह जंगल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। जलावन, पशुओं के चरागाह और पर्यावरण संतुलन के लिए उन्होंने वर्षों से इस जंगल को बचाकर रखा है। अब यदि इसी तरह जंगल को काटकर पट्टे बांटे गए तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। मामले को लेकर उप प्रभागीय वनाधिकारी (एसडीओ) अखिलेश सिंह पटेल ने बताया कि सोमवार से संबंधित फाइल खोली जाएगी। इसके बाद स्थलीय निरीक्षण और विस्तृत जांच कराई जाएगी। यदि जांच में यह पाया गया कि नियमों के विरुद्ध पट्टा दिया गया है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और गलत तरीके से दिए गए पट्टे निरस्त किए जाएंगे।

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