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क्लस्टर आवास योजना में गरीबों का हक छीना, दबंगों और माफियाओं का कब्जा!

सोनभद्र:- सरकार की महत्वाकांक्षी क्लस्टर आवास योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण, मुसहर और वंचित परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, अब भ्रष्टाचार और दबंगई की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। योजना के तहत शौचालय, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से युक्त आवास गरीबों को दिए जाने थे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। बिल्ली मारकुंडी के बॉडी क्षेत्र में, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओबरा ‘स’ तापीय विस्तार परियोजना (2×660 मेगावाट) के सीएसआर मद से वर्ष 2023-24 में ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी के टोला बाड़ी में क्लस्टर आवास और उसके पास इंटरलॉकिंग का कार्य कराया गया था, जिसे क्षेत्र की सुंदरता और विकास का प्रतीक बताया गया। लेकिन अब आरोप है कि कुछ सरहंग और प्रभावशाली लोग गरीबों के हक पर डाका डालते हुए इन आवासों में अपने पोकलेन मशीन ऑपरेटरों और चहेतों को बसाने में लगे हैं। जिन जरूरतमंद परिवारों के लिए ये घर बने थे, वे आज भी बेघर या झुग्गियों में रहने को मजबूर हैं। 👉 स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और वे इसे खुलेआम गरीबों के हक की लूट बता रहे हैं। 👉 यदि समय रहते जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में असहायों का आशियाना पूरी तरह दबंगों के कब्जे में चला जाएगा। प्रश्न उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस घोटाले पर कार्रवाई करेंगे या गरीबों का हक यूं ही लुटता रहेगा?

sonbhadra

8:05 PM, Apr 3, 2026

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Edited by: Son Prabhat

क्लस्टर आवास योजना में गरीबों का हक छीना, दबंगों और माफियाओं का कब्जा!
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

सोनभद्र:- सरकार की महत्वाकांक्षी क्लस्टर आवास योजना, जिसका उद्देश्य ग्रामीण, मुसहर और वंचित परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, अब भ्रष्टाचार और दबंगई की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। योजना के तहत शौचालय, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं से युक्त आवास गरीबों को दिए जाने थे, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। बिल्ली मारकुंडी के बॉडी क्षेत्र में, उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की ओबरा ‘स’ तापीय विस्तार परियोजना (2×660 मेगावाट) के सीएसआर मद से वर्ष 2023-24 में ग्राम पंचायत बिल्ली मारकुंडी के टोला बाड़ी में क्लस्टर आवास और उसके पास इंटरलॉकिंग का कार्य कराया गया था, जिसे क्षेत्र की सुंदरता और विकास का प्रतीक बताया गया। लेकिन अब आरोप है कि कुछ सरहंग और प्रभावशाली लोग गरीबों के हक पर डाका डालते हुए इन आवासों में अपने पोकलेन मशीन ऑपरेटरों और चहेतों को बसाने में लगे हैं। जिन जरूरतमंद परिवारों के लिए ये घर बने थे, वे आज भी बेघर या झुग्गियों में रहने को मजबूर हैं। 👉 स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और वे इसे खुलेआम गरीबों के हक की लूट बता रहे हैं। 👉 यदि समय रहते जांच कर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में असहायों का आशियाना पूरी तरह दबंगों के कब्जे में चला जाएगा। प्रश्न उठता है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस घोटाले पर कार्रवाई करेंगे या गरीबों का हक यूं ही लुटता रहेगा?

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