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यूपी का सोनभद्र जिला को कहा जाता है स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया, जाने क्यों?

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8:44 PM, Jan 7, 2024

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Edited by: Ashish Gupta

यूपी का सोनभद्र जिला को कहा जाता है स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया, जाने क्यों?
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

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संपादकीय/ यू. गुप्ता / सोन प्रभात

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पूरे भारत में वैसे तो कई जिलें है लेकिन आज हम आपको बताने जा रहे है उत्तर प्रदेश के एक मात्र इकलौते जिले के बारे में जिसे कहा जाता है, स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया। इस जिले से चार राज्यों की सीमाएं भी लगती हैं, जिस कारण यह देश का इकलौता यूनिक जिला भी बन जाता है।

आपको बताते चले कि सोनभद्र जिले की स्थापना 1989 में इसे मिर्जापुर जिले से अलग कर बनाया गया था। औद्योगिक इतिहास के मामले में भी इसे सबसे अहम जिला माना जाता है। यहां खनिज पदार्थ, बिजली, सीमेंट, एल्युमीनियम उद्योग से जुड़ा अनेको काम यहा पर आप को देखने को मिल जाएगा।

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सोनभद्र जिला एक औद्योगिक क्षेत्र है। इस जिले में बहुत सारे खनिज जैसे बॉक्साइट चूना पत्थर , कोयला, सोना इत्यादि है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता इतना अद्भुत है कि कोई भी इसे देखकर मोहित हो जाता है।

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सोनभद्र की भौगोलिक स्थिति

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उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला जिसकी सीमा चार राज्यों से होकर जाती हैं। इन राज्यों में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और झारखंड है। इन राज्यों की सीमाएं सोनभद्र जिले से होकर गुजरती हैं। विंध्य और कैमूर पहाड़ियों में स्थित यह जिला खनिज सम्पदा से घिरा हुआ है। अगर हम सब क्षेत्रफल की बात करें तो खीरी जनपद के बाद यह उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला माना जाता है।

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सोनभद्र की जनसंख्या लगभग 15-16 लाख है। इसके साथ ही सोनभद्र की जनसंख्या उत्तर प्रदेश में सबसे कम 198 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। सोनभद्र जिले का नाम यहाँ की सोन नदी के नाम से पड़ा है। सोन नदी के अलावा रिहन्द नदी , कनहर नदी , पांगन नदी आदि कईं नदिया भी सोनभद्र से गुजरती हैं।

सोनभद्र विंध्य और कैमूर पर्वत श्रंखला के बीचों बीच मे स्थित है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्वतीय पर्यटक स्थल होने की वजह से इसे देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने सोनभद्र को स्विट्जरलैंड ऑफ इंडिया का नाम दिया था। आपको बता दें, वे सन 1954 में एक सीमेन्ट फैक्ट्री का उद्घाटन करने के लिए सोनभद्र आये थे, उसी दौरान वे सोनभद्र जिले से काफी प्रभावित हुए थे। सोनभद्र को एनर्जी कैपिटल ऑफ इंडिया भी कहा जाता है, क्योंकि यहां सबसे अधिक बिजली के कारखाने लगे हैं।

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सोनभद्र सड़क मार्ग द्वारा लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, मिर्ज़ापुर आदि से जुड़ा हुआ है। सोनभद्र के लिए बस, प्राइवेट टैक्सी वाराणसी और मिर्ज़ापुर से 24 घंटे उपलब्ध रहती हैं। वाराणसी से सोनभद्र के लिए बसें चौबीसो घंटे उपलब्ध हैं और जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज तक पहुंचने में लगभग दो घंटे लगते है जो वाराणसी से लगभग 75 किलोमीटर दूर है। सोनभद्र पहुचने का सबसे आसान तरीका वाराणसी, मिर्जापुर से ट्रेन या बस है।

ऐतिहासिक स्थल और जुड़ी अहम जानकारी

अगोरी का किला सोन नदी के किनारे चोपन से लगभग 8-9 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह किला तीन तरफ से नदियों द्वारा घिरा हुआ है जिनका नाम बिजुल नदी, रेणु नदी और सोन नदी है। इस किले पर पहले खरवार शासकों का शासन था लेकिन कुछ समय बाद इस किले पर चंदेलो द्वारा कब्जा किया गया। इस किले को आदिवासी किला भी कहा जाता है क्योंकि इस किले का अंतिम शासक एक आदिवासी राजा थे। इस किले में अदृश्य शक्तियों का राज है। बताया जाता है कि यह अदृश्य शक्तियाँ इस किले के खजाने की सुरक्षा करती हैं। यह किला अंदर से कुछ डरावना भी है। यह किला अब खंडहर के रूप में तब्दील हो गया है।

चंद्रकांता सीरियल देखा है? कहानी इसी जिले की है।

अगर आपने चंद्रकांता सीरियल टी वी पर देखा होगा तो यह वही किला है जिस पर पूरी चंद्रकांता का टी वी सीरियल बना हुआ है। राजकुमारी का किला यही विजयगढ़ का है। यह किला लगभग 400 फीट ऊंचे पहाड़ पर बना हुआ है। यहा के रहने वाले लोग बताते हैं कि इस किले के नीचे एक और किला बना है जहां पर अकूत खजाना दबा हुआ है उस खजाने को खोजने के लिए कई बार रात में लोग जा चुके हैं। यह किला रहस्यों से भरा हुआ है यही विजयगढ़ का किला महाभारत के समय से प्रसिद्ध है इस किलो को राजा बाणासुर द्वारा बनवाया गया था बाद में इसे महाराजा विजयपाल द्वारा पुनः निर्मित किया गया था विजयगढ़ किले के अंतिम शासक काशी नरेश चेत सिंह थे।

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पर्यटन स्थल और अन्य महत्वपूर्ण जगहें

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धंधरौल बांध रॉबर्ट्सगंज - चुर्क मार्ग पर रोबर्टसगंज से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस बांध का निर्माण घाघरा नदी पर किया गया है इसलिए इसे घाघरा बांध भी कहा जाता है। इस जगह पर जरूर घूमे, यहां पर भारी संख्या में पर्यटकों का भीड़ लगा रहता है।

मुक्खा वाटरफॉल रोबर्टसगंज से घोरावल रोड पर पश्चिम में लगभग 44 किलोमीटर तथा घोरावल से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। वाटरफॉल सोनभद्र जिले में बेलन नदी पर स्थित है।

शिवद्वार का मंदिर घोरावल से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है। यह मंदिर भगवान शिव और उनकी पत्नी पार्वती जी को समर्पित है। इस मंदिर में देवी पार्वती की 11 वीं सदी की काले पत्थर की मूर्ति रखी हुई है। यह मूर्ति लगभग 3 फुट ऊंची है। शिवद्वार में शिवरात्रि के समय एक मेला का आयोजन किया जाता है। इस मेले में भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और भोलेनाथ का दर्शन करने के लिए तथा सावन में कावड़ यात्रा के भक्त यहां पर जल चढ़ाने आते हैं।

पंचमुखी महादेव का मंदिर राबर्टसगंज से चुर्क जाते समय बीच में पड़ता है। इसकी दूरी लगभग 3 किलोमीटर है। पौराणिक कथाओं के अनुसार पता चलता है कि पंचमुखी पांचवी शताब्दी में प्रकट हुए थे। यहां पर भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। यह मंदिर एक पहाड़ी पर बना हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि यह मंदिर आदिवासियों के समय का बनाया गया है।

इको पॉइंट रॉबर्टसगंज से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी पर वीर लोरिक पत्थर के पास स्थित है। यह पॉइंट पर्यटकों का सबसे पसंदीदा स्थान है, आप यहां पर रुक के एक सुंदर दृश्य का नजारा देख सकते हैं। यदि आप प्रकृति के प्रेमी है तो यह जगह आपको बहुत ज्यादा पसंद आएगा खासकर आप जब बरसात का मौसम शुरू हो जाता है।

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वीर लोरिक पत्थर इको पॉइंट से मात्र 100 मीटर की दूरी पर स्थित है। अगर आप इको पॉइंट पर रुक रहे हैं तो इस वीर लोरिक पत्थर को भी जरूर देखें इस का भी अपना एक इतिहास और रहस्य है।

सलखन फॉसिल्स पार्क, जिसे आधिकारिक तौर पर सोनभद्र फॉसिल्स पार्क के नाम से भी जाना जाता है, भारत के उत्तर प्रदेश में एक जीवाश्म पार्क है। यह सोनभद्र जिले में राज्य राजमार्ग SH5A पर सलखन गाँव के पास रॉबर्ट्सगंज से 12 किमी दूर स्थित है। पार्क में जीवाश्म लगभग 1400 मिलियन वर्ष पुराने होने का अनुमान है। जीवाश्म पत्थरों पर छल्ले के रूप में दिखाई देते हैं और पार्क में पत्थरों पर जीवाश्म के छल्ले में बिखरे हुए हैं जो कैमूर वन्यजीव रेंज में लगभग 25 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं। इस पार्क का उद्घाटन 8 अगस्त 2002 में जिला मजिस्ट्रेट भगवान शंकर द्वारा जीवाश्म पार्क के रूप में किया गया था।

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रेणुकेश्वर महादेव मंदिर सोनभद्र के रेणुकूट में स्थित है। यह मंदिर महादेव भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। रेणुकूट में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले स्थानों में से एक एक मन्दिर है इस मंदिर का निर्माण बिरला ग्रुप द्वारा 1972 में किया गया था। यह मंदिर कलाकारी में बहुत ही बेजोड है।

रिहंद बांध को गोविंद बल्लभ पंत सागर के नाम से भी जाना जाता है यह पिपरी में स्थित है। यह बांध मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा पर बना हुआ है। रिहंद बांध रिहंद नदी पर बना है जो सोन नदी की सहायक नदी है। इस बांध से प्रतिवर्ष सबसेअधिक मात्रा में बिजली उत्पन्न किया जाता है।

वैष्णो देवी का मंदिर मानव निर्मित है। इस मंदिर को कश्मीर की वैष्णो देवी का नकल माना जा सकता है। इस मंदिर में भक्तों को दर्शन करने के लिए गुफा से होकर जाना पड़ता है। यह मंदिर बहुत ही सुंदर और अद्भुत मंदिर है। डाला वैष्णो देवी का मंदिर रॉबर्टसगंज से मात्र 32 KM की दूरी पर है।

ज्वालामुखी शक्तिपीठ का मंदिर शक्तिनगर में स्थित है जोकि सोनभद्र जिले में है। यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर में देवी सती की जीभ की पूजा की जाती है। नवरात्रि के समय यहां पर पर्यटकों की बहुत भीड़ रहती है।

इन सबके अलावा सोनभद्र में बहुत सारे पर्यटक स्थल है जहां आप घूम सकते हैं। जैसे---

मारकंडेय ऋषि की तपोस्थली कंडाकोट, मत्स्येंद्रनाथ गुफा, चुनहवा दरी, अमिला धाम, सिलहट बांध, नगवां बांध, भैंसहवा नाला, नल राजा महादेव, बरैला शिव मंदिर, ब्लैक बक घाटी महुअरिया, ओम पर्वत, मंगलेश्वर महादेव, सलखन फासिल्स पार्क, गोठानी संगम तट स्थित सोमेश्वर महादेव, कुंडवासिनी देवी, ओबरा बांध, आबाड़ी पिकनिक स्पॉट, रेणुकूट राधा कृष्ण मंदिर, बेलवादह, चिल्का झील, औड़ी पहाड़ी स्थित हनुमान मंदिर आदि कई पर्यटक और मनोरम दृश्य लोगो को अपनी ओर आकर्षित करते है।

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