Sonbhadra:आरोग्य मंदिर में लटका मिला ताला, एंबुलेंस में गूंजी किलकारी; स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
सोनभद्र। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच बीजपुर पुनर्वास प्रथम स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का मामला सामने आया है। गुरुवार शाम प्रसव पीड़ा से तड़पती एक गर्भवती महिला को केंद्र पर ताला बंद मिला।
8:38 PM, Oct 10, 2026
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Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

बीजपुर पुनर्वास प्रथम के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में नहीं मिला स्टाफ, रास्ते में प्रसूता ने दिया बच्चे को जन्म; जच्चा-बच्चा सुरक्षित
सोनभद्र। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच बीजपुर पुनर्वास प्रथम स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का मामला सामने आया है। गुरुवार शाम प्रसव पीड़ा से तड़पती एक गर्भवती महिला को केंद्र पर ताला बंद मिला। मौके पर चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मियों के मौजूद नहीं रहने के कारण महिला को एंबुलेंस में ही बच्चे को जन्म देना पड़ा। राहत की बात यह रही कि जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।जानकारी के अनुसार, प्रसव पीड़ा बढ़ने पर परिजनों ने स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। परिजनों ने संबंधित एएनएम को फोन भी किया, लेकिन कथित तौर पर कॉल रिसीव नहीं हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक, संबंधित कर्मचारी का स्थानांतरण म्योरपुर हो चुका है, लेकिन उसके स्थान पर किसी अन्य स्वास्थ्यकर्मी की तैनाती नहीं की गई थी।रास्ते में एंबुलेंस में हुआ प्रसवस्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों की मदद से एंबुलेंस बुलाई गई और प्रसूता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) म्योरपुर ले जाया जाने लगा। इसी दौरान सेवकाडाड़ के पास रास्ते में महिला की प्रसव पीड़ा तेज हो गई और एंबुलेंस के भीतर ही प्रसव हो गया। घटना के बाद जच्चा और नवजात की सुरक्षित स्थिति की जानकारी सामने आई।
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पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामलेग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले नेमना निवासी गायत्री के नवजात की प्रसव के दौरान मौत होने का मामला भी सामने आया था। लगातार ऐसी घटनाएं सामने आने से ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्यकर्मियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और संबंधित उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, ड्यूटी से गैरहाजिर कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने तथा आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर नियमित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित करने की मांग की है।
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चिकित्सा प्रभारी ने क्या कहा?
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मामले में चिकित्सा प्रभारी डॉ. रणधीर राणा ने बताया कि उन्हें शाम करीब पांच बजे फोन आया था। उनके अनुसार, स्टाफ ने महिला को पहले ही म्योरपुर के लिए रेफर कर दिया था। उन्होंने कहा, “अब रास्ते में कुछ होता है तो उसमें हम क्या कर सकते हैं।”हालांकि, केंद्र पर ताला बंद मिलने, संबंधित स्वास्थ्यकर्मी की अनुपस्थिति और वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने के आरोपों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए विभागीय जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग है कि मामले की जांच कर यह पता लगाया जाए कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को समय पर स्वास्थ्य सुविधा क्यों नहीं मिल सकी और केंद्र पर कर्मचारियों की अनुपस्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर नियमित ड्यूटी और वैकल्पिक स्टाफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।






