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विश्व महिला दिवस पर विशेष,96 वर्ष की उम्र में भी कर रही है गौ सेवा द्वितीय विश्वयुद्ध के सैनिक की पत्नी

'- बीते 50 वर्षो से कर रही गौ सेवा - गौ सेवा से होते है,शारीरिक और मानसिक विकास के साथ प्राकृतिक संवर्धन

sonbhadra

8:06 PM, Mar 14, 2026

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Edited by: Ashish Gupta

विश्व महिला दिवस पर विशेष,96 वर्ष की उम्र में भी कर रही है गौ सेवा द्वितीय विश्वयुद्ध के सैनिक की पत्नी
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

'- बीते 50 वर्षो से कर रही गौ सेवा - गौ सेवा से होते है,शारीरिक और मानसिक विकास के साथ प्राकृतिक संवर्धन

म्योरपुर (सोनभद्र)स्थानीय

विकास खंड के ग्राम पंचायत खैराही की निवासी एवं पूर्व सैनिक की पत्नी सावित्री देवी पचास वर्षों से भी अधिक समय से गौ सेवा एवं गौ पालन कर रही है। 96 वर्षीय की उम्र है,बावजूद इनके जज्बे और हौसले इतने ज्यादा बुलंद है कि गौ सेवा करने मे कभी पिछे नही हटती और वह बताती है कि इंसान को कभी हार नही मानना चाहिए चाहे कितनी भी कठिनाईयो का सामना करना पड़े।इनका कहना है कि वह प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठकर नित्य वह सुबह और शाम को गौऊवो की सेवा मे निस्वार्थ भाव से लग जाती है। मानना है कि आज गौ सेवा से ही हम स्वस्थ एवं खुशी से जीवन व्यतीत कर रहे है। इनका मानना है कि गौ सेवा करने से विशेषकर हमको दो फायदे महसूस होते है,पहला शारीरिक और दूसरा मानसिक।गौ सेवा से शारीरिक एवं मानसिक तौर पर तेजी से विकास होता है।उनका मानना है कि अगर प्रत्येक इंसान गौसेवा करे तो कैसी भी परेशानीया आएंगी कुछ समय बाद वह परेशानी कोसों दूर चली जांएग उनका मानना है कि गौ के अंदर 33 करोड़ देवी देवताओ का वास है। और गोबर का प्रकृति के साथ जुड़ाव है ।इस दौर में जहां लोग अपने आप को सही डंग से नही चला पाते वही 96 की उम्र में भी बिल्कुल स्वस्थ्य है और हार मानने को तैयार नही होती।अपने को ज्यादा समय गौ सेवा मे देती है।उनका कहना है कि इंसान एक दिन शरीर छोड़कर चला जाएगा लेकिन उसकी अच्छाईया और बुराईया यही लोगो के बीच रह जाएगीं,जैसा जो कर्म करेगा वैसा ही फल पाएगा।   ## क्या कहना है इनका द्वितीय विश्व युद्ध में पैर में लगी थी गोली   सावित्री देवी ने बताया कि उनके पति स्व केदारनाथ दुबे फौज मे थे।1942 मे केदारनाथ दुबे की भर्ती डोगरा रेजीमेंट मे हुई थी।भर्ती होने के बाद उनको पाकिस्तान के लाहौर मे ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था उस वक्त लाहौर भारत का ही हिस्सा था।फौज मे भर्ती होने के बाद दुबे को दछिण अफ्रीका,सिंगापुर और बर्मा जैसे देश मे फौज के तरफ से कुछ दिनो के लिए भेजा गया था। 1945 मे द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत वर्मा युद्ध के लिए भेजा गया था,युद्ध के दौरान केदारनाथ दुबे के बांए पैर के घुटने मे गोली लग गई थी।1946 मे इनके मेडिकल अनफिट होने के कारण उनको फौज छोड़ना पड़ा था।

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