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विशेष रिपोर्ट | खंता–अबाड़ी (मिनी गोवा) को पर्यटन स्थल बनाने की मांग तेज, रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद.

प्रकृति की गोद में छिपा पर्यटन खजाना

sonbhadra

4:42 PM, Apr 3, 2026

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Edited by: Ashish Gupta

विशेष रिपोर्ट | खंता–अबाड़ी (मिनी गोवा) को पर्यटन स्थल बनाने की मांग तेज, रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद.
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सोन प्रभात लाइव न्यूज़ डेस्क

प्रकृति की गोद में छिपा पर्यटन खजाना

म्योरपुर (सोनभद्र) | Ashish Gupta, सोन प्रभात न्यूज़

सोनभद्र जनपद के म्योरपुर विकासखंड क्षेत्र में स्थित खंता पिकनिक स्पॉट, अबाड़ी (मिनी गोवा), रनटोला और मुर्धवा की प्राचीन चट्टानें अब पर्यटन के नक्शे पर लाने की मांग तेज हो गई है। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता एवं पर्यावरण चिंतक प्रशांत दुबे ने इन स्थलों को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई है।

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पर्यटन से बदल सकती है क्षेत्र की तस्वीर

लखनऊ स्थित मान्यवर कांशीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म मैनेजमेंट से होमस्टे प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटे प्रशांत दुबे का मानना है कि—

👉 यह क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बेहद समृद्ध और अन्य मैदानी जिलों से पूरी तरह अलग है 👉 यहां की जीवनशैली, संस्कृति और परंपराएं भी विशिष्ट हैं

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उन्होंने कहा—

“यदि खंता और अबाड़ी को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए, तो यहां देश-विदेश के पर्यटक वर्षभर आएंगे और स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।”

होमस्टे मॉडल से बढ़ेगा रोजगार

पर्यटन विकास के तहत—

  • होमस्टे की सुविधा विकसित की जा सकती है
  • पर्यटक स्थानीय घरों में ठहरकर 👉 यहां की संस्कृति, खानपान और जीवनशैली का अनुभव करेंगे

👉 इससे—

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  • ग्रामीणों की आय बढ़ेगी
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए साधन विकसित होंगे

प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक धरोहर का संगम

विशेषज्ञों के अनुसार यह क्षेत्र पर्यटन की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि—

  • यहां की वनस्पतियां और जैव विविधता अनूठी है
  • रनटोला और मुर्धवा की लगभग 180 करोड़ वर्ष पुरानी चट्टानें एक महत्वपूर्ण भू-वैज्ञानिक धरोहर हैं
  • प्राकृतिक झरने, चट्टानें और हरियाली इसे “मिनी गोवा” जैसा अनुभव प्रदान करती हैं,  साथ ही यहां के पारंपरिक व्यंजन और आदिवासी संस्कृति पर्यटकों के लिए एक अलग ही आकर्षण बन सकते हैं।

राजस्व और विकास की संभावनाएं

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यदि इन स्थलों को विकसित किया जाता है, तो—

  • पर्यटन से जिले की राजस्व आय में वृद्धि होगी
  • स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी
  • क्षेत्र का समग्र विकास संभव होगा

👉 जिस तरह अन्य पर्यटन स्थलों पर देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, उसी तरह सोनभद्र भी एक नई पहचान बना सकता है।

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स्थानीय मांग और उम्मीद

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि— 👉 “प्राकृतिक सुंदरता होने के बावजूद अब तक इन स्थलों का सही उपयोग नहीं हो पाया है।”

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अब मांग की जा रही है कि—

  • सरकार इन स्थलों को चिन्हित कर
  • आवश्यक सुविधाएं विकसित करे
  • और पर्यटन के रूप में प्रचारित करे

सोन प्रभात विश्लेषण

खंता और अबाड़ी जैसे स्थल सिर्फ पिकनिक स्पॉट नहीं, बल्कि सोनभद्र के भविष्य के पर्यटन हब बन सकते हैं, जरूरत है—

  • सही योजना
  • बुनियादी ढांचा
  • और स्थानीय भागीदारी

ताकि यह क्षेत्र “छुपा हुआ खजाना” नहीं, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद बन सके।

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