आदिवासी राजनीति का युगांत: नहीं रहे विजय सिंह गोंड — दुद्धी के ‘आदिवासी गांधी’ को अंतिम प्रणाम
wp:paragraph
duddhi
2:15 PM, Jan 8, 2026
Share:
Edited by: Son Prabhat

wp:paragraph
• आठ बार विधायक रहे ‘आदिवासियों के गांधी’, जिन्होंने दुद्धी को दिलाई राजनीतिक पहचान
/wp:paragraph
• वनवासी सेवा आश्रम से विधानसभा तक—एक आदिवासी योद्धा की ऐतिहासिक यात्रा का अंत
सोनभद्र | Sonprabhat News
आदिवासी समाज की बुलंद आवाज, दुद्धी विधानसभा के सबसे लंबे समय तक प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक और उत्तर प्रदेश की राजनीति में आदिवासी अधिकारों के प्रखर प्रहरी विजय सिंह गोंड का बुधवार को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में इलाज के दौरान निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। दोनों किडनियों के खराब होने के कारण उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई थी।
wp:image {"id":71534,"sizeSlug":"large","align":"center"}
/wp:image
उनके निधन की पुष्टि विधानसभा अध्यक्ष अवध नारायण यादव ने की। जैसे ही यह खबर सोनभद्र, दुद्धी और आसपास के अंचलों में पहुँची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक, सामाजिक और विशेष रूप से आदिवासी समाज के लिए यह क्षति अपूरणीय मानी जा रही है।
wp:separator
/wp:separator
आठ बार विधायक, आदिवासी राजनीति के पितामह
10 मार्च 1957 को जन्मे विजय सिंह गोंड ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत बेहद साधारण परिस्थितियों से की। वर्ष 1979 में वे वनवासी सेवा आश्रम में मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर कार्यरत थे। उसी संघर्षशील दौर में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
wp:image {"id":71546,"sizeSlug":"large"}
1989 में उन्होंने अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को पराजित कर आदिवासी राजनीति में एक नया अध्याय लिखा। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। विभिन्न राजनीतिक दलों से होते हुए वे 1980 से आठ बार उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य चुने गए और अंततः समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता के रूप में स्थापित हुए।
दुद्धी और ओबरा को एसटी सीट दिलाने की ऐतिहासिक लड़ाई
विजय सिंह गोंड का राजनीतिक संघर्ष केवल सत्ता तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने दुद्धी और ओबरा विधानसभा सीटों को अनुसूचित जनजाति (ST) घोषित कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। यह संघर्ष आदिवासी समाज के राजनीतिक अधिकारों की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।
सदन के भीतर और बाहर वे लगातार आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की आवाज उठाते रहे। इसी कारण उन्हें लोग प्रेम से “आदिवासियों का गांधी” भी कहते थे।
मुलायम सरकार में रहे राज्य मंत्री
विज्ञापन
यह भी पढ़ें
समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान वे मुलायम सिंह यादव मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री रहे। सत्ता में रहते हुए भी उनकी छवि एक सरल, सुलभ और जमीन से जुड़े नेता की बनी रही। वे हमेशा कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच मौजूद रहते थे।
wp:image {"id":71536,"sizeSlug":"large","align":"center"}
Sonprabhat के साथ यादगार संवाद
Sonprabhat News के लिए यह एक भावुक क्षण है। संपादक आशीष गुप्ता के साथ विजय सिंह गोंड की दो अंतिम वीडियो बातचीत और एक यादगार पॉडकास्ट आज अमूल्य धरोहर बन गई है।
पिछले उपचुनाव के दौरान—
wp:image {"id":71540,"sizeSlug":"large","align":"center"}
एक बार चुनाव से पहले
और दूसरी बार चुनाव के बाद विस्तृत बातचीत की गई थी, जिसमें उन्होंने आदिवासी राजनीति, भविष्य की दिशा और अपने संघर्षों को खुलकर साझा किया था।
Sonprabhat परिवार उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
wp:paragraph {"align":"center"}
👉 🎥 Sonprabhat News पर उनके अंतिम बात-चीत
एक युग का अंत
दुद्धी विधानसभा के सबसे लंबे कार्यकाल वाले विधायक, आदिवासी समाज के योद्धा और संघर्षों से राजनीति की ऊँचाइयों तक पहुँचने वाले विजय सिंह गोंड का जाना केवल एक नेता का जाना नहीं, बल्कि एक पूरे युग का अंत है।
wp:image {"id":71544,"sizeSlug":"large","linkDestination":"none","align":"center"}
नेता, कार्यकर्ता, सामाजिक संगठन और आम लोग उन्हें आदिवासी अस्मिता के प्रहरी के रूप में सदैव याद रखेंगे।
wp:image {"id":71548,"sizeSlug":"large","align":"center"}
आदिवासी समाज के इस महान सपूत को Sonprabhat News की ओर से शत्-शत् नमन।






