कूटरचित खतौनी लगाकर किसान ऋण लेने का आरोप, सहकारी समिति में मचा हड़कंप
केकराही (सोनभद्र)। करमा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बी-पैक्स सहकारी समिति केकराही से कथित तौर पर कूटरचित एवं फर्जी खतौनी के आधार पर किसान ऋण लेने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद सहकारिता विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में कुचमरवा गांव निवासी पिता-पुत्र पर संदिग्ध भूमि अभिलेख जमा कर समिति से ऋण प्राप्त करने का आरोप लगा है।
9:11 PM, Nov 5, 2026
Share:
Edited By: Shaktipal , Reported By: Son prabhat live

शिकायत के बाद दो किसानों को नोटिस जारी, तहसील से प्रमाणित खतौनी मांगी गईजांच में ऑनलाइन अभिलेखों और जमा खतौनी में मिली गड़बड़ी,
दोषी पाए जाने पर किसानों व कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई
केकराही (सोनभद्र)। करमा थाना क्षेत्र के अंतर्गत बी-पैक्स सहकारी समिति केकराही से कथित तौर पर कूटरचित एवं फर्जी खतौनी के आधार पर किसान ऋण लेने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद सहकारिता विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में कुचमरवा गांव निवासी पिता-पुत्र पर संदिग्ध भूमि अभिलेख जमा कर समिति से ऋण प्राप्त करने का आरोप लगा है।समिति के अध्यक्ष रामसेवक सिंह एवं सचिव धीरज त्रिपाठी के अनुसार, कुचमरवा गांव निवासी रामेश्वर दत्त मिश्र एवं उनके पुत्र वैभव मिश्र द्वारा ऋण के लिए जमा की गई खतौनी की ऑनलाइन जांच में विसंगतियां सामने आई हैं।
विज्ञापन
आरोप है कि ग्राम कुचमरवा के गाटा संख्या 113 मि., खाता संख्या 00065 की जमा खतौनी में भूमि का रकबा 1.090 हेक्टेयर दर्शाया गया है, जबकि ऑनलाइन राजस्व अभिलेख में मात्र 0.0900 हेक्टेयर ही प्रदर्शित हो रहा है।इसी प्रकार कसया खुर्द गांव से संबंधित चकबंदी विभाग की हस्तलिखित खतौनी, जिसमें खाता संख्या 30 तथा गाटा संख्या 21 एवं 127 का कुल रकबा 1.3380 हेक्टेयर दर्शाया गया है, उसकी प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए गए हैं।इस संबंध में समिति के सचिव धीरज त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद जमा किए गए अभिलेखों की ऑनलाइन जांच कराई गई, जिसमें प्रथम दृष्टया गड़बड़ी प्रतीत हुई है।
दोनों किसानों को नोटिस जारी कर संबंधित गाटों एवं खातों की तहसीलदार से प्रमाणित खतौनी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि निर्धारित समय में संतोषजनक स्पष्टीकरण एवं प्रमाणित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने पर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कूटरचित दस्तावेजों के इस्तेमाल और समिति के साथ धोखाधड़ी की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।वहीं, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता संजय वर्मा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है।
यह भी पढ़ें
जांच में जो भी किसान अथवा कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।ऋण वितरण प्रक्रिया पर भी उठे सवालइस प्रकरण ने सहकारी समितियों में किसान ऋण वितरण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि यदि ऋण के लिए जमा की गई खतौनी में भूमि के रकबे और ऑनलाइन राजस्व अभिलेखों में अंतर था, तो ऋण स्वीकृत करने से पहले संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन क्यों नहीं किया गया?
विज्ञापन
नियमानुसार ऋण वितरण से पूर्व आवश्यक अभिलेखों की जांच और गवाहों की पुष्टि की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में दस्तावेजों के सत्यापन में कथित चूक भी जांच का विषय है।सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल दो किसानों से संबंधित मामला सामने आया है। हालांकि, जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि प्रकरण में अनियमितता कितने लोगों तक फैली है और ऋण वितरण में किसी कर्मचारी की भूमिका रही है या नहीं।अब देखना यह होगा कि जांच के बाद कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ऋण लेने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है या
मामला विभागीय कार्रवाई तक ही सीमित रह जाता है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ऋण वितरण में दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाले कर्मचारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं।






